Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में मोहम्मदी-पुवाया मार्ग पर हुए भीषण हादसे के बाद अब राहत और बचाव कार्य (Rescue Operation) युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। गन्ने से लदे ओवरहाइट ट्रक के नीचे दबी स्कूल गाड़ी को निकालने के लिए प्रशासन ने अब पूरी ताकत झोंक दी है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, मौके पर कई जेसीबी (JCB) मशीनें और भारी क्रेन पहुँच चुकी हैं, जिनकी मदद से गन्ने के विशाल मलबे को हटाने का काम तेज़ी से किया जा रहा है।
मलबे में दबी मासूमों की जान
हादसे के काफी देर बाद भारी मशीनरी के पहुँचने से रेस्क्यू ऑपरेशन में तेज़ी आई है। गन्ने का बोझ इतना अधिक है कि वैन का ढांचा बुरी तरह दब चुका है। पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन की मौजूदगी में जेसीबी मशीनें सड़क पर बिखरे गन्ने को साफ कर रही हैं, ताकि क्रेन के जरिए ट्रक और दबी हुई वैन को सुरक्षित अलग किया जा सके। सूत्रों का कहना है कि वैन के भीतर फंसे बच्चों और चालक को सुरक्षित बाहर निकालना इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Lakhimpur Kheri: विधायक और प्रशासन की मौजूदगी
क्षेत्रीय विधायक दर्जा प्राप्त मंत्री लोकेंद्र प्रताप सिंह खुद मौके पर डटे हुए हैं और बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि एक-एक पल कीमती है, इसलिए बिना देरी किए वैन तक पहुँचा जाए। मौके पर एम्बुलेंस और मेडिकल टीमें भी तैनात कर दी गई हैं, ताकि जैसे ही किसी को बाहर निकाला जाए, उसे तुरंत उपचार मिल सके।
ओवरलोडिंग के खिलाफ जनाक्रोश
हादसे वाली जगह पर हज़ारों की संख्या में ग्रामीण और राहगीर मौजूद हैं। लोगों में इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि आखिर परिवहन विभाग (RTO) और पुलिस ने इन ओवरहाइट ट्रकों को सड़कों पर चलने की इजाज़त कैसे दी? नेशनल लेवल पर यह मुद्दा गरमाता जा रहा है कि क्या मासूमों की जान की कीमत इन चीनी मिलों के मुनाफे और ओवरलोडिंग के कारोबार से कम है? जेसीबी और क्रेन की मदद से रेस्क्यू अब अंतिम चरण में पहुँचने की उम्मीद है। पुलिस ने इलाके की घेराबंदी कर दी है ताकि भीड़ बचाव कार्य में बाधा न बने। पूरे प्रदेश की निगाहें अब लखीमपुर के इस मोड़ पर टिकी हैं, जहाँ मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष जारी है।
Report BY: संजय कुमार
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