Health: आंवला सर्दियों में मिलने वाली एक औषधि है, जिसका सेवन करके शरीर की अनेक बीमारियों को दूर किया जा सकता है। आयुर्वेद में आंवला को “अमृत फल” कहा जाता है, जो रक्त को शुद्ध करने और चेहरे तथा बालों के लिए भी फायदेमंद है। आमतौर पर लोग आंवले का जूस पीते हैं या फिर इसके कड़वे स्वाद वाले फल को खाने की कोशिश करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आंवले का जल भी उतना ही गुणकारी होता है जितना कि आंवले का रस?
Health: त्रिदोष को करता है संतुलित
आयुर्वेद के अनुसार, आंवला त्रिदोष को संतुलित करता है। इसका सेवन वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में मदद करता है और रक्त को साफ करता है। कई बार लोगों के लिए आंवले का रस पीना कठिन होता है, लेकिन यदि वे आंवले के जल का सेवन करते हैं तो यह भी उतना ही फायदेमंद साबित होगा। आंवला जल इसी सिद्धांत पर आधारित है। यह कोई त्वरित समाधान नहीं है और न ही यह शरीर में जबरदस्ती बदलाव लाने का प्रयास करता है; बल्कि यह पित्त को शांत करते हुए पाचन की अग्नि को बनाए रखते हुए ओज का निर्माण करता है। इसके लिए रात में आंवले को कद्दूकस कर लें या छोटे टुकड़ों में काटकर एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें। सुबह होते ही पानी को उबालें और छानकर इसे पिएं।
बढ़ाता है रोग प्रतिरोधक क्षमता
Health: आंवला जल पित्त को शांत करता है, ओज बढ़ाता है, अम्लता और शरीर की गर्मी को कम करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, त्वचा और बालों की चमक बढ़ाता है, रक्त की शुद्धि करता है और शरीर से विषैले पदार्थों को निकालता है। इसका सेवन रोजाना खाली पेट लगभग एक महीने तक करना चाहिए। ध्यान रहे कि यदि आपकी पाचन शक्ति कमजोर हो तो आंवले के रस का सेवन न करें, और अगर आप सर्दी से परेशान हैं या कफ की समस्या से ग्रसित हैं तो भी आंवले के रस से परहेज करें। आंवले का रस ठंडी तासीर रखता है, जो कफ को बढ़ा सकता है।
Written by: Yamini yadav
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