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‘ज्ञान की कोई सीमा नहीं, अज्ञान की कोई उम्र नहीं’-सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर तंज वायरल

Parliament News: भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती, लेकिन अज्ञान की कोई उम्र भी नहीं होती। उन्होंने यह टिप्पणी राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा के उस बयान के संदर्भ में की, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से अपील की थी कि वे अपनी पार्टी को ‘अबोध बालक’ का बंधक न बनाएं।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि यदि ‘अबोध’ शब्द का प्रयोग किया गया है तो उसका आशय स्पष्ट है— ‘बोध’ यानी ज्ञान, और ‘अ’ प्रत्यय से बना ‘अबोध’, अर्थात जिसे ज्ञान न हो। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के आचरण से यह बात बार-बार प्रमाणित होती है।

संसदीय प्रक्रिया और राष्ट्रीय सुरक्षा का दिया उदाहरण

भाजपा सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अबोध होने का प्रमाण यह है कि यदि किसी को यह समझ न हो कि सदन के पटल पर मीडिया रिपोर्ट्स को सब्सटेंशियल एविडेंस नहीं माना जाता, तो यह संसदीय प्रक्रिया की अज्ञानता दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट सदन में प्रामाणिक तथ्य नहीं होती।

इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा कि सेना प्रमुख, प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के बीच होने वाला संवाद अत्यंत संवेदनशील और गोपनीय होता है, जो ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट, 1923 के अंतर्गत आता है। ऐसे विषय सार्वजनिक चर्चा या पब्लिक डोमेन में नहीं हो सकते। जो इन बुनियादी बातों को नहीं जानता, वही ‘अबोध’ की श्रेणी में आता है।

Parliament News: नेहरू–केनेडी पत्र का किया उल्लेख

सुधांशु त्रिवेदी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 19 नवंबर 1962 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी को लिखा गया पत्र इसका उदाहरण है, जो बाद में डिक्लासिफाइड हुआ। उन्होंने दावा किया कि उस पत्र में भारत के लिए अमेरिकी बी-2 बॉम्बर, पायलट, तकनीकी स्टाफ और रडार सिस्टम की मांग की गई थी, जिसमें संचालन तक अमेरिकी नियंत्रण की बात कही गई थी।

उन्होंने कहा कि उस समय अमेरिका में भारत के राजदूत बी.के. नेहरू ने अपनी किताब ‘नाइस गाइज फिनिश सेकंड’ में इस पत्र को सौंपते समय हुई शर्मिंदगी का उल्लेख किया है और इसे तत्कालीन नेतृत्व के “शर्मनाक सरेंडर” के रूप में वर्णित किया है।

सदन में बयान पर हुआ विवाद

गौरतलब है कि गुरुवार को राज्यसभा में जेपी नड्डा ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से कहा था कि वे अपनी पार्टी को ‘अबोध बालक’ का बंधक न बनाएं। इस टिप्पणी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कड़ी आपत्ति जताते हुए सदन में विरोध दर्ज कराया।

https://x.com/SudhanshuTrived/status/2019318758922416528?s=20

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