Dark Online Games: आज के डिजिटल समय में बच्चों और किशोरों का ज़्यादातर वक्त ऑनलाइन गेम्स और सोशल मीडिया पर बीत रहा है। मोबाइल और इंटरनेट उनकी रोज़ की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। गेम खेलना और ऑनलाइन बात करना अब आम बात है। लेकिन गाजियाबाद में तीन सगी बहनों की आत्महत्या की घटना ने एक बहुत गंभीर खतरे को सामने ला दिया है। इस घटना से पता चलता है कि ब्लू व्हेल चैलेंज, मोमो चैलेंज और कोरियन थीम वाले तथाकथित “लव गेम्स” जैसे खतरनाक डार्क रोलप्ले गेम्स फिर से बच्चों और टीनएजर्स को अपनी ओर खींच रहे हैं। इन गेम्स का असर धीरे-धीरे बच्चों के दिमाग पर पड़ता है, जिसे समय रहते समझना और रोकना माता-पिता के लिए बहुत ज़रूरी हो गया है।

ऑनलाइन गेम की खतरनाक लत
गाजियाबाद की तीनों बहनें, जिनकी उम्र 12 से 16 साल थी, एक ऑनलाइन कोरियन थीम वाले गेम की बहुत ज़्यादा आदी हो गई थीं। वे इतना ज़्यादा गेम में डूब गईं कि कई सालों तक स्कूल जाना ही बंद कर दिया। उनके पिता ने उन्हें गेम खेलने से रोकने की कोशिश की, लेकिन इससे घर में झगड़े और तनाव बढ़ने लगे। धीरे-धीरे हालात बिगड़ते चले गए और अंत में यह एक बेहद दुखद घटना में बदल गया। इस घटना ने पूरे देश में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और मोबाइल-गेम की लत को लेकर चिंता और चर्चा फिर से बढ़ा दी है।
Dark Online Games: छिपे ग्रुप और मानसिक दबाव
मोमो चैलेंज, ब्लू व्हेल चैलेंज और कोरियन “लव गेम्स” जैसे कुछ ऑनलाइन गेम बच्चों और किशोरों से छोटे-छोटे काम करवाने को कहते हैं। शुरुआत में ये काम बिल्कुल साधारण लगते हैं, जैसे रात में देर तक जागना या कुछ वीडियो देखना। लेकिन धीरे-धीरे ये गेम बच्चों को ऐसे काम करने के लिए मजबूर करने लगते हैं, जो खतरनाक होते हैं। इससे बच्चे की सोच बदलने लगती है, उसकी दिनचर्या बिगड़ जाती है और उसका व्यवहार भी अलग हो जाता है।

इन गेम्स के अलावा इंटरनेट पर कुछ छिपे हुए ग्रुप भी होते हैं। ये ग्रुप खुद को मदद करने वाले या दोस्ती का सहारा देने वाले बताते हैं, लेकिन असल में वे बच्चों पर चुपचाप मानसिक दबाव डालते हैं। बच्चों से कहा जाता है कि वे किसी को कुछ न बताएं और उनकी भावनाओं से खेला जाता है। इसी दबाव में कई बच्चे बहुत गलत और खतरनाक फैसले लेने लगते हैं, जिनका अंजाम बेहद दुखद हो सकता है।
ऑनलाइन गेम की खतरनाक लत
सिर्फ डार्क गेम्स ही नहीं, अगर कोई बच्चा किसी भी ऑनलाइन गेम का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने लगे, तो वह भी उसके लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके कुछ साफ संकेत होते हैं, जैसे मोबाइल या कंप्यूटर पर बहुत ज्यादा समय बिताना, परिवार और दोस्तों से दूरी बनाना, पढ़ाई में मन न लगना और बिना वजह चिड़चिड़ा या उदास रहना। विशेषज्ञ बताते हैं कि जब गेम खेलना सिर्फ मनोरंजन न रहकर आदत या जुनून बन जाता है, तो इससे बच्चों की मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ता है और वे गलत फैसलों की ओर बढ़ सकते हैं।

Dark Online Games: रोलप्ले कम्युनिटी का मानसिक खतरा
इसके अलावा सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी रोलप्ले कम्युनिटी भी हैं, जो बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं। ये ग्रुप बच्चों को हिंसा, दुख या खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी चीजों को अभिनय के रूप में करने के लिए उकसाते हैं। धीरे-धीरे बच्चों को यह सब सामान्य लगने लगता है और वे सही-गलत का फर्क समझना भूल सकते हैं।
इन घटनाओं से साफ होता है कि माता-पिता और समाज की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें, उनसे खुलकर बात करें और समय रहते ऐसे संकेत पहचान लें। ऐसा करने से कई गंभीर और दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है।







