Intestinal Infection: अक्सर लोग हल्के पेट दर्द या बार-बार होने वाली पेट की परेशानी को गैस या बदहजमी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन यह हर बार मामूली समस्या नहीं होती। कई बार ऐसा दर्द पेट के अंदर मौजूद आंतों से जुड़ी किसी गंभीर परेशानी का संकेत भी हो सकता है।पेट से जुड़ी दिक्कतें सिर्फ पाचन तंत्र के खराब होने की वजह से नहीं होतीं, बल्कि ये आंतों की सेहत बिगड़ने का इशारा भी कर सकती हैं। आजकल जंक फूड और गलत खान-पान की आदतों के कारण आंतों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

आंतों की बढ़ती समस्याएं
आयुर्वेद में आंतों के संक्रमण को अतिसार, ग्रहणी दोष और कृमि रोग जैसी समस्याओं से जोड़ा गया है। ये परेशानियां आमतौर पर आंतों में वायरस, फंगस या परजीवी के बढ़ने से होती हैं। इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करता है, तो इससे भी आंतों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। एंटीबायोटिक दवाएं आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाती हैं। आयुर्वेद में ऐसे संक्रमण को कम करने और शरीर को अंदर से साफ करने के लिए कुछ घरेलू उपाय बताए गए हैं।

Intestinal Infection: छाछ और त्रिफला लाभ
पहला उपाय है छाछ का सेवन। छाछ पेट और आंत दोनों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है। दोपहर के समय छाछ में भुना हुआ जीरा और काला नमक मिलाकर पीने से पाचन बेहतर होता है। इससे आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ते हैं और पेट हल्का रहता है। दूसरा उपाय है त्रिफला चूर्ण। आयुर्वेद में त्रिफला को पेट और आंतों के लिए बेहद असरदार माना गया है। यह पेट की गंदगी को बाहर निकालने और आंतों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इसके लिए रोज रात को गुनगुने पानी के साथ त्रिफला चूर्ण का सेवन करना चाहिए।

हल्दी से सूजन में राहत
तीसरा उपाय है हल्दी और दूध। कई बार आंतों में संक्रमण के कारण सूजन हो जाती है, जिससे पेट दर्द बढ़ जाता है। ऐसे में रात को हल्दी वाला दूध पीने से सूजन कम होती है और दर्द में राहत मिलती है। चौथा उपाय है अजवाइन और सौंठ का सेवन। ये दोनों चीजें पेट और आंतों के लिए लाभकारी होती हैं। अजवाइन और सौंठ खाने से गैस, ऐंठन और अपच की समस्या कम होती है, जिससे आंतों पर पड़ने वाला दबाव भी घटता है।
पांचवां उपाय है अनार का छिलका या अनार का रस। अनार के छिलके या रस के सेवन से आंतों में अच्छे बैक्टीरिया पनपते हैं। अनार में मौजूद टैनिन और एलाजिक एसिड आंतों की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। इसके साथ-साथ बेल का रस भी पेट और आंतों की सेहत के लिए लाभकारी माना जाता है।
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