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585 दिन बाद सियासत गरमाई: अलीगढ़ लोकसभा चुनाव पर हाईकोर्ट में ट्रायल तय

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ लोकसभा चुनाव में जीत को चुनौती देने वाली याचिका पर सात महत्वपूर्ण सवाल तय करते हुए ट्रायल चलाने का निर्देश दिया है। मामले में ईवीएम, मतगणना और प्रशासनिक भूमिका की विस्तार से जांच होगी।
585 दिन बाद सियासत गरमाई: अलीगढ़ लोकसभा चुनाव पर हाईकोर्ट में ट्रायल तय

Aligarh Election Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ से भाजपा सांसद सतीश गौतम की लोकसभा चुनाव में हुई जीत को चुनौती देने वाली याचिका पर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सपा प्रत्याशी रहे चौधरी बिजेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई के बाद सात महत्वपूर्ण बिंदु तय करते हुए मामले में ट्रायल चलाने का आदेश दिया है। अब इन सभी मुद्दों पर विस्तार से अदालत में सुनवाई होगी।

तीसरी जीत पर कानूनी चुनौती

यह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार की एकल पीठ द्वारा पारित किया गया। चौधरी बिजेंद्र सिंह ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सतीश गौतम की जीत को कोर्ट में चुनौती दी थी। इस चुनाव में सतीश गौतम ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की थी और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 15,647 मतों के अंतर से हराया था।

Aligarh Election Case: हाईकोर्ट में ट्रायल तय
हाईकोर्ट में ट्रायल तय

याचिका में आरोप लगाए गए हैं कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हुआ, प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की और कई स्तरों पर गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन सभी मामलों की शिकायतें करने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

Aligarh Election Case: इन 7 अहम बिंदुओं पर होगी कोर्ट में सुनवाई

हाईकोर्ट ने जिन सात मुद्दों पर ट्रायल चलाने का निर्देश दिया है, वे इस प्रकार हैं:

  1. क्या नामांकन प्रक्रिया में किसी प्रत्याशी का नामांकन गलत तरीके से स्वीकार या खारिज किया गया?

  2. ईवीएम की सीलिंग और हस्ताक्षर की तारीखों में अंतर होने का कानूनी असर क्या पड़ता है?

  3. क्या चुनाव से जुड़े जरूरी प्रमाण पत्र समय पर जमा किए गए थे या नहीं?

  4. क्या लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123(6) का उल्लंघन हुआ?

  5. मतगणना के दौरान पारदर्शिता और तय प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं?
  6. क्या ऐसी अनियमितताएं हुईं, जिनसे चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकता था?
  7. चुनाव के दौरान प्रशासन की भूमिका निष्पक्ष रही या पक्षपातपूर्ण?

कोर्ट ने साफ किया है कि इन सभी सवालों की जांच अब विधिवत ट्रायल के जरिए की जाएगी।

11 ईवीएम की गिनती न होने का गंभीर आरोप

याचिका में यह भी कहा गया है कि 11 ईवीएम मशीनों की गिनती नहीं की गई, जिससे चुनाव परिणाम पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा शहरी विधानसभा क्षेत्र में मतगणना के अंतिम पांच राउंड को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

चौधरी बिजेंद्र सिंह ने यह भी दावा किया कि शहर की अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में वोटों के अंतर में असामान्य बदलाव देखने को मिला, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

585 दिन बाद फिर केंद्र में आया चुनावी विवाद

लोकसभा चुनाव के 585 दिन बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। हाईकोर्ट के इस आदेश से अलीगढ़ संसदीय सीट की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। ट्रायल के दौरान चुनाव प्रक्रिया, मतगणना और प्रशासनिक फैसलों की गहराई से जांच की जाएगी।

भाजपा और सपा की प्रतिक्रियाएं

सपा नेता चौधरी बिजेंद्र सिंह ने कहा कि अदालत का यह फैसला लोकतंत्र को मजबूत करने वाला है और उन्हें न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है। वहीं, भाजपा सांसद सतीश गौतम ने कहा कि उन्होंने चुनाव पूरी पारदर्शिता और नियमों के अनुसार जीता है और वे अदालत में हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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