Vande Mataram: सरकार की नई गाइडलाइन के तहत राष्ट्रगान और वंदे मातरम् को निर्धारित समय तीन मिनट दस सेकेंड में गाना अनिवार्य किए जाने के फैसले पर सियासी बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. एस.टी. हसन ने सरकार के निर्णय पर सवाल खड़े किए हैं।
डॉ. हसन ने कहा कि भारत अनेकता में एकता का देश है और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग धर्मों और विचारधाराओं के लोग रहते हैं, जिनकी अपनी-अपनी मान्यताएं हैं। उनके अनुसार, कुछ लोग वंदे मातरम् को इबादत के रूप में देखते हैं, जबकि इस्लाम में जमीन की पूजा की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में सिख, ईसाई, मुसलमान समेत विभिन्न समुदायों के लोग रहते हैं और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो किसी धर्म को नहीं मानते। डॉ. हसन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को किसी गीत या नारे के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
पूर्व सांसद ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या इस तरह के निर्णय से महंगाई कम होगी, रोजगार बढ़ेगा या औद्योगिक विकास पर कोई सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा? उन्होंने आशंका जताई कि इससे सामाजिक सौहार्द पर असर पड़ सकता है और विवाद की स्थिति बन सकती है। डॉ. हसन ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी पसंद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को किसी नारे या धार्मिक उद्घोषणा के लिए मजबूर करना उचित नहीं है और ऐसे मामलों में अदालतें भी हस्तक्षेप करती रही हैं।
फिलहाल, सरकार की इस गाइडलाइन को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा जारी है और विभिन्न दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
Report By: सलमान युसूफ
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