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मोहन भागवत की बड़ी मांग: जानवरों से जुड़े फैसले विशेषज्ञ लें, अलग वेटरिनरी काउंसिल बने

Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को एक सशक्त और अलग वेटरिनरी काउंसिल के गठन की पैरवी करते हुए कहा कि जानवरों और जनसुरक्षा से जुड़े फैसले विषय-विशेषज्ञों और वेटरिनरी डॉक्टरों के मार्गदर्शन में ही लिए जाने चाहिए।

राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधन

मोहन भागवत नागपुर में इंडियन सोसायटी फॉर एडवांसमेंट ऑफ कैनाइन प्रैक्टिस (आईएसएसीपी) के 22वें वार्षिक अधिवेशन और ‘रोल ऑफ कैनाइन इन वन हेल्थ: बिल्डिंग पार्टनरशिप्स एंड रिजॉल्विंग चैलेंजेज’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन आईएसएसीपी, महाराष्ट्र एनिमल एंड फिशरी साइंसेज यूनिवर्सिटी (एमएएफएसयू) और नेशनल एसोसिएशन फॉर वेलफेयर ऑफ एनिमल्स एंड रिसर्च (एनएडब्ल्यूएआर) ने संयुक्त रूप से किया।

Mohan Bhagwat: “मैं भी इसी कॉलेज का छात्र रहा हूं”

अपने संबोधन की शुरुआत में भागवत ने कहा कि उन्होंने इसी कॉलेज से पढ़ाई की थी, हालांकि वेटरिनरी क्षेत्र छोड़े उन्हें लगभग 50 वर्ष हो चुके हैं। उन्होंने पूर्व छात्र के रूप में आमंत्रित किए जाने पर आभार व्यक्त किया।

कृषि आधारित देश में पशुपालन की अहम भूमिका

भागवत ने कहा कि भारत जैसे कृषि-आधारित देश को तब तक व्यापक लाभ मिला, जब तक किसान खेती के साथ पशुपालन और मत्स्य पालन भी करते रहे।उन्होंने वेटरिनरी पेशे की भूमिका को सीमित मानने की सोच को गलत बताते हुए कहा कि समाज, जनस्वास्थ्य और नीति निर्माण में वेटरिनरी विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

Mohan Bhagwat: आवारा कुत्तों के मुद्दे पर संतुलित दृष्टिकोण

दिल्ली में हाल में आवारा कुत्तों को लेकर हुए विवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बहस दो चरम सीमाओं में बंट गई थी। “एक पक्ष कहता है सभी कुत्तों को मार दो, दूसरा कहता है उन्हें छुओ भी मत। लेकिन अगर इंसानों को कुत्तों के साथ रहना है तो वैज्ञानिक और व्यावहारिक समाधान खोजने होंगे,” उन्होंने कहा। उन्होंने सुझाव दिया कि नसबंदी जैसे उपायों से कुत्तों की संख्या नियंत्रित की जा सकती है और जनसुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

अलग वेटरिनरी काउंसिल की जरूरत

संस्थागत सुधार की मांग करते हुए भागवत ने कहा, “अलग वेटरिनरी काउंसिल होनी चाहिए। जानवरों से जुड़े फैसले उन्हीं के हाथ में होने चाहिए जो इस विषय को समझते हैं।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे खेलों में निर्णय खेल विशेषज्ञ लेते हैं, वैसे ही हर क्षेत्र में फैसले संबंधित विशेषज्ञों को ही लेने चाहिए।

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