Rahul gandhi: संसद के दोनों सदनों में गुरुवार को राजनीतिक माहौल गरम रहा। भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में राहुल गांधी के विरुद्ध ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए उन पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया। दुबे ने उनकी संसद सदस्यता समाप्त करने तथा उन्हें चुनाव लड़ने से आजीवन अयोग्य घोषित करने की मांग की।
विशेषाधिकार हनन पर असमंजस
सूत्रों के अनुसार, सरकार राहुल गांधी के विरुद्ध विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने के पक्ष में नहीं है। इस पर प्रियंका गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि इस प्रकार के प्रस्ताव लाए जा रहे हैं तो सभी के लिए समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए। भारतीय जनता पार्टी के मुख्य सचेतक संजय जायसवाल ने बजट चर्चा के दौरान राहुल गांधी के भाषण के कुछ अंशों को सदन की कार्यवाही से हटाने के लिए औपचारिक सूचना दी है। उनका कहना है कि लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
Rahul gandhi: संसदीय कार्य मंत्री का आरोप
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक दृश्य सामग्री साझा करते हुए दावा किया कि चार फरवरी को लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में हुए घटनाक्रम के दौरान विपक्षी सदस्यों ने अनुचित भाषा का प्रयोग किया। हालांकि प्रियंका गांधी ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने किसी को उकसाया नहीं और शांतिपूर्वक अपनी बात रखी।
Rahul gandhi: राज्यसभा में वित्त मंत्री का वक्तव्य
राज्यसभा में बजट पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार देश को विश्व स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों के विरोध पर सभापति ने नियम पुस्तिका का हवाला देते हुए कहा कि किसी सदस्य के वक्तव्य के बीच टिप्पणी करना संसदीय मर्यादा के विरुद्ध है।
महंगाई और वित्तीय प्रबंधन पर टिप्पणी
Rahul gandhi: निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार करदाताओं के धन का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग कर रही है। उन्होंने पूर्व और वर्तमान काल की तुलना करते हुए दावा किया कि राजकोषीय घाटा नियंत्रित हुआ है तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से बड़ी राशि सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाई गई है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि महंगाई के मुद्दे पर केवल राजनीतिक बयान दिए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों में करदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। संसद में जारी इस राजनीतिक टकराव के बीच दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। आने वाले दिनों में इस विषय पर बहस और तेज होने की संभावना है।
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