UP News: जहाँ 13 साल की उम्र में अधिकतर बच्चे मोबाइल गेम्स और स्कूल की किताबों के बीच अपनी दुनिया सीमित रखते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले जयवर्धन त्यागी ने एक ऐसी मिसाल कायम की है जिसकी चर्चा आज पूरे देश में हो रही है। जयवर्धन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ताकत का इस्तेमाल कर हेल्थकेयर सेक्टर की जटिल समस्याओं को सुलझाने के लिए ‘न्यूरापेक्स एआई’ (Neurapex AI) नाम का एक क्रांतिकारी प्लेटफॉर्म तैयार किया है। जयवर्धन की यह उपलब्धि और उनकी कंपनी की 12 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन ने यह साबित कर दिया है कि इनोवेशन और विजन का उम्र से कोई लेना-देना नहीं होता।
एआई टूल का प्रदर्शन
जयवर्धन त्यागी पहली बार तब सुर्खियों में आए, जब उन्होंने ‘शार्क टैंक इंडिया सीजन 5’ के मंच पर कदम रखा और अपनी बेमिसाल तकनीकी समझ से देश के दिग्गज बिजनेस लीडर्स को हैरान कर दिया। इस मंच पर जयवर्धन ने अपने खास एआई टूल का प्रदर्शन किया, जो मेडिकल डायग्नोसिस की पूरी प्रक्रिया को बदल देने की क्षमता रखता है। उनका यह प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से न्यूरोलॉजी और डर्मेटोलॉजी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर केंद्रित है। जयवर्धन ने अपनी पिच के दौरान जिस आत्मविश्वास के साथ अपनी कंपनी की वैल्यूएशन और भविष्य के विजन को रखा, उसने वहां मौजूद हर शख्स को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि 13 साल का एक बच्चा इतनी गहरी तकनीकी समझ कैसे रख सकता है।

जयवर्धन की कंपनी ‘न्यूरापेक्स एआई’ एक असिस्टिव मेडटेक प्लेटफॉर्म है, जो डॉक्टरों के लिए एक सुपर-फास्ट सपोर्ट सिस्टम की तरह काम करता है। यह टूल मल्टीमॉडल एआई का इस्तेमाल कर एमआरआई स्कैन, लैब रिपोर्ट्स, मेडिकल इमेजेस और मरीज की पिछली हेल्थ हिस्ट्री को गहराई से एनालाइज करता है। आज के समय में अस्पतालों में आने वाले हजारों स्कैन और रिपोर्ट्स को मैन्युअली चेक करना डॉक्टरों के लिए थका देने वाला काम होता है, लेकिन जयवर्धन का यह प्लेटफॉर्म उस डेटा को पिक्सल लेवल पर प्रोसेस कर उसे बेहद स्पष्ट और ‘एक्शन योग्य’ रिपोर्ट में बदल देता है। इससे डॉक्टरों को शुरुआती डायग्नोसिस और केस की गंभीरता को समझने में लगने वाला कीमती समय बच जाता है।
UP News: सपने देखने के लिए खास उम्र का होना जरूरी
शार्क टैंक के मंच पर जयवर्धन की इस काबिलियत को देखते हुए ‘बोट’ (boAt) के को-फाउंडर अमन गुप्ता ने उनके विजन पर भरोसा जताया। अमन गुप्ता ने जयवर्धन की कंपनी में 60 लाख रुपये का निवेश कर 5 प्रतिशत की हिस्सेदारी ली, जिससे महज एक साल पुरानी इस स्टार्टअप की वैल्यूएशन सीधे 12 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। अमन गुप्ता ने न केवल निवेश किया, बल्कि इस युवा टैलेंट को आगे ले जाने के लिए मेंटरशिप देने का भी वादा किया। हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने क्लिनिकल वैलिडेशन और सर्टिफिकेशन जैसी चुनौतियों की ओर इशारा किया, लेकिन जयवर्धन की इस उपलब्धि ने हेल्थकेयर सेक्टर में एआई की संभावनाओं पर एक नई बहस छेड़ दी है।
महज 13 साल की उम्र में गाजियाबाद के इस लड़के ने जो रास्ता दिखाया है, वह आने वाले समय में भारत को ग्लोबल एआई मैप पर एक नई पहचान दिला सकता है। जयवर्धन की यह कहानी आज हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो यह सोचता है कि बड़े सपने देखने के लिए किसी खास उम्र का होना जरूरी है।
Report By: विभु मिश्रा
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