Bangladesh Election: बांग्लादेश में 12 फरवरी को छह बजे तक मत डाले गये थे। और उसके तुरंत बाद मतगणना शुरू हुई। 47 प्रतिशत मतदाताओं ने ही चुनाव में भाग लिया। आधी रात होते-होते तक तीन सौ संसदीय सीटों में से 120 बीएनपी पार्टी तारिक रहमान के सदस्य जीत चुके थे,। इस टंªेड से लग ही रहा था कि तारिक रहमान ही प्रधानमंत्री का पद संभांलेंगे। हुआ भी ऐसा ही, 13 फरवरी को बीएनपी दल को पूर्ण बहुमत मिल चुका था। भारत विरोधी जमाते इस्लामी, जिसके नेता शफिकुर रहमान हैं, जो सबसे बड़े दल का नेतृत्व कर रहे हैं, अपने गठबंधन के साथ चुनावी दौड़ में दूसरे स्थान पर रहे। उनकी हार से भारत को राहत भी मिल सकती है। क्योंकि धुर इस्लाम समर्थक यह दल, बांग्लादेश के भीतर और पड़ोसी देश भारत के लिए संकट ही पैदा कर सकता था। हालांकि चुनाव हार गई यह पार्टी अपनी अन्य गतिविधियों से पाकिस्तान के साथ सांठगांठ कर हिंदु-मुस्लिम एकता को तोड़ने की कोशिश कर सकती है। सांप्रदायिकता किसी भी देश के लिए उन्नति का आधार नहीं हो सकती है।
चुनाव की तारीख नजदीक आते ही बेगम जिया की मृत्यु ने यह आभास तो मुझे करा दिया था कि बांग्लादेश के चुनाव में सहानुभूति के वोट उनके बेटे तारिक रहमान को प्रधानमंत्री की कुर्सी दिला सकती है। मैंने तारिक रहमान के चुनाव जीतने का इस तरह का लेख ‘खबर इंडिया’ के लिए लिखा भी था, जो छपा भी। चुनाव रिजल्ट ने यह साबित भी कर दिया।
आज बांग्लादेश में चुनावी विजय पर बांग्लदेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने, जो वक्तव्य दिया वह चुनाव प्रक्रिया में हुई धांध्लियों की ओर इशारा करता है। सबसे पहले तो देश में मतदाता उदासीन रहे, वह वोट देने घर से नहीं निकले, क्योंकि 47 प्रतिशत मतदाता ही वोट डालने आये। वह मानती हैं कि चुनाव में मेरी पार्टी आवामी लीग और मुझे चुनाव लड़ने से रोका गया। मेरी पार्टी की मान्यता समाप्त कर दी गई। मतदान चल ही रहा था, तो उसी समय मत गणना शुरू कर दी गई। यह मत गणना सही नहीं है।
मुझे भी आश्चर्य हुआ जब भारत में मतदान के बाद कई दिनों तक मत गणना के लिए रुकना पड़ता है, तब ऐसी स्थिति में तुरंत मत दान और तुरंत मत गणना कैसे हो सकती है। ऐसी गतिविधियों से संशय को जन्म मिल रहा है। बांग्लादेश को जिस उद्येश्य के लिए मुजिबुर्र रहमान ने पाकिस्तान से बांग्लादेश को भारत की मदद से अलग करवाया था, वह मकसद पूरा नहीं हो रहा है। बांग्लादेश को अपनी भाषा, कला और संस्कृति की पहचान को बनाये रखने के लिए पाकिस्तान से अलग करवाया था। आज फिर पाकिस्तान उस पर पानी फेरने में लगा हुआ है। पाकिस्तान और अन्य देश, जो भारत से डाह रखते हैं, वे बांग्लादेश को भारत के करीब नहीं देखना चाहते हैं, चीन भी उसमें एक है। चीन दुनिया में अपने विस्तारवादी नीतियों के लिए माना जाता है। भारत के साथ इसी व्यवहार से अपनी सीमाओं का विस्तार भारत की सीमाओं को पीछे धकेलकर करना चाहता है। आने वाला समय बांग्लादेश कैसी अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति का शिकार होगा, वह वहां की सोच और प्रक्रिया पर दिखेगा।
लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल
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