Bangladesh: बांग्लादेश चुनाव में बांग्लादेश नेशनल पार्टी के चुनाव के बाद भारत से प्रधानमंत्री मोदी ने बधाई संदेश भेजा है। लेकिन उसके उत्तर में तारिक रहमान ने मोदीजी को संदेश दिया कि पहले वह शेख हसीना को भारत से बांग्लादेश लौटायें! बीएनपी के जीत के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदलने लगे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग ने संकेत दिया है कि वह शीघ्र ही बीएनपी से संपर्क कर सकती है। देश से बाहर रह रहे शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने एक साक्षात्कार में कहा है कि बीएनपी बांग्लादेश की बड़ी पार्टी है, उनसे जल्दी ही बातचीत के रास्ते खुल सकते हैं। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने आवामी लीग पार्टी पर प्रतिबंध लगाकर चुनाव से बाहर कर दिया था।
सीएनएन-न्यूज18 के साथ एक वार्ता में सजीब वाजेद ने कहा, ‘‘बीएनपी बांग्लादेश की बड़ी पार्टी है। हम जल्द ही उनसे संपर्क करेंगे। वर्ष 2024 में जुलाई विद्रोह में सत्ता से हटाने के बाद शेख हसीना भागकर भारत आ गईं थी। बांग्लादेश और भारत के बीच तनाव का एक मुद्दा शेख हसीना को भारत में शरण देने का रहा है। लेकिन भारत ने हमेशा संकट की घड़ी में आवामी लीग पार्टी को सहारा दिया है। बांग्लादेश बनवाने में भारत की भूमिका इतिहास में दर्ज है।
शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने कहा कि संकट की घड़ी में भारत हमेशा से एक अच्छा दोस्त रहा है। ऐसे समय में भारत ने मेरी मां की जान बचाई है। अगर वह बांग्लादेश नहीं छोड़तीं, तो उग्रवादियों ने उनकी हत्या की योजना बना ली होती। इसलिए मैं अपनी मॉ की जान बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का हमेशा आभारी रहूंगा। ‘‘ट्रायल से पहले ही अदालत के 17 जजों को बर्खास्त कर दिया गया, नये जज नियुक्त किए गए, जिनमें से कुछ को बेंच पर काम करने का बिल्कुल भी अनुभव नहीं था और वे राजनीति से जुड़े हुए थे। इसलिए कोई उचित प्रक्रिया नहीं थी। बांग्लादेश में एक अनिर्वाचित, असंवैधानिक और अवैध सरकार है। मेरी मॉ को दोषी ठहराने के लिए, उनके मुकदमें की सुनवाई तेज करने के लिए कानूनों में संशोधन किया गया। मेरी मॉ को अपने बचाव पक्ष के वकील की नियुक्ति करने की अनुमति नहीं थी।‘‘
चार दशक पहले जब शेख मुजीब के पूरे परिवार की हत्या की गई, तब भी जान बचाने के लिए शेख हसीना अपनी बहन के साथ भारत में आकर रही थी। लेकिन इस बार, तो वह अपदस्त प्रधानमंत्री थीं, ऐसे में उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा, यह काफी बड़ी घटना थी। बांग्लादेश के नये प्रधानमंत्री 60 वर्षीय तारिक रहमान होंगे। इन्होंने 2008 मे देश छोड़ दिया था। पिछले क्रिसमस पर वह बांग्लादेश लौटे, जब अगस्त 2024 में शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से बाहर कर दिया गया था। रहमान की मॉ खालिदा जिया का बांग्लादेश की राजनीति में काफी बड़ा दबदबा था। लंबे समय तक वह बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं। और रहमान के पिता जियाउर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति 1977 से 1981 तक रहे।
तारिक रहमान के देश लौटने के बाद उनकी मॉ खालिदा जिया की लंबी बीमारी के बाद मृत्यु हो गई थी, उस दौरान वह कारावास में थीं। उन्होंने उससे पूर्व रहमान को बीएन पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया था। ऐसी परिस्थितियों में बांग्लादेश की जनता ने तारिक रहमान को सहानुभूति से देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा दिया। सबसे मजे की बात, तो यह हुई जिस छात्र संगठन ने शेख हसीना को पद से बर्खास्त किया था, उस पार्टी को चार सीटें ही चुनाव में मिल पाई। इससे यह संकेत मिलते हैं कि देश की जनता बांग्लादेश में हिंसा से कुर्सी तक पहुंचने की नीति को अस्वीकार करती है।
लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल
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