Up news: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा कि हर कोई शंकराचार्य नहीं हो सकता और न ही कोई व्यक्ति किसी भी पीठ का आचार्य बनकर माहौल खराब कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मर्यादाओं का पालन सबको करना होगा और कानून से ऊपर कोई नहीं है। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि संबंधित व्यक्ति वास्तव में शंकराचार्य थे, तो वाराणसी में उनके खिलाफ लाठीचार्ज और एफआईआर क्यों दर्ज हुई? उन्होंने कहा कि जो लोग नैतिकता की बात करते हैं, उन्हें पहले अपने आचरण पर ध्यान देना चाहिए।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता
सीएम योगी ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम से भगदड़ जैसी स्थिति बन सकती है, जिससे श्रद्धालुओं की जान जोखिम में पड़ सकती है। सरकार की प्राथमिकता व्यवस्था बनाए रखना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समाजवादी पार्टी किसी को पूजना चाहती है तो यह उनका मामला है, लेकिन सरकार कानून के शासन पर चलती है।
Up news: अखिलेश यादव का पलटवार
वहीं, सपा अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने उन्हें “नकली योगी” बताते हुए कहा कि प्रदेश में सांप्रदायिक और अलोकतांत्रिक माहौल बनाया जा रहा है। अखिलेश ने कानपुर को बदनाम करने और बुलडोजर की राजनीति का आरोप भी लगाया। साथ ही उन्होंने शिक्षा व्यवस्था और “Make in India” को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।
संगम पर क्या हुआ था?
Up news: यह विवाद प्रयागराज के संगम तट पर मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों के साथ रथ और पालकी से स्नान के लिए निकले थे, लेकिन भारी भीड़ का हवाला देते हुए पुलिस ने उन्हें बैरियर पर रोक दिया। आरोप है कि समर्थकों ने बैरियर तोड़ दिए, जिससे करीब तीन घंटे तक अव्यवस्था की स्थिति बनी रही। बाद में शंकराचार्य ने प्रशासन पर जानबूझकर कार्रवाई करने का आरोप लगाया। मामले को लेकर सियासत गरमा गई है, लेकिन प्रशासन का कहना है कि साढ़े चार करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मर्यादा और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
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