AI Impact Summit India: अगले सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित होने जा रहे एआई इम्पैक्ट समिट से पहले, डेटा सुरक्षा कंपनी रुब्रिक के चेयरमैन और सीईओ विपुल सिन्हा ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को केवल खतरे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बजाय इसे बदलाव और विकास का एक बड़ा अवसर माना जाना चाहिए।

भारत में एआई समिट का महत्व
उन्होंने आईएएनएस को दिए एक विशेष इंटरव्यू में बताया कि इस समय भारत में यह समिट आयोजित करना बहुत महत्वपूर्ण है। देश अब एआई को अलग-अलग स्तरों पर समझते हुए उसे व्यावहारिक रूप में लागू करने की दिशा में बढ़ रहा है। उनका कहना था कि एआई केवल तकनीक नहीं है, बल्कि इसका असली मकसद इसे व्यवसाय और रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल करना है।
सिन्हा ने कहा कि दुनिया भर में अब तक हुए कई एआई सम्मेलनों में इस तकनीक के खतरों पर ज्यादा ध्यान दिया गया, लेकिन नई दिल्ली का यह समिट अवसर और प्रभाव पर केंद्रित होगा।

AI Impact Summit India: रोजगार पर एआई के नए अवसर
उन्होंने यह भी कहा कि भारत के पास मजबूत तकनीकी कार्यबल और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे में निवेश है, जिससे वह एप्लाइड एआई (उपयोग आधारित एआई) के क्षेत्र में वैश्विक भूमिका निभा सकता है। हालांकि एआई में जोखिम भी हैं, लेकिन इसके अवसर कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। भारत ने पहले मोबाइल, इंटरनेट, डिजिटल पेमेंट और पहचान प्रणालियों में तेज बदलाव देखा, और अब एआई ज्ञान की खाई को कम कर सकता है और आम लोगों के जीवन को बेहतर बना सकता है।
रोजगार को लेकर उठ रही चिंताओं पर विपुल सिन्हा ने कहा कि एआई से जुड़ी नौकरियों को लेकर डर कुछ हद तक बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है। उनका मानना है कि जैसे पहले कृषि, औद्योगिक और ज्ञान आधारित काम के दौर आए, वैसे ही अब ‘इंट्यूशन लेबर’ का दौर आएगा। इससे नई नौकरियों और उद्यमिता के अवसर पैदा होंगे।

एआई मॉडल के लिए विशेषज्ञ और निवेश
सिन्हा ने बताया कि एआई मॉडल बनाने के लिए केवल सीमित विशेषज्ञों की जरूरत होती है, लेकिन इसे लागू करने और व्यवसायों में उतारने के लिए बड़ी संख्या में इंजीनियरों और पेशेवरों की आवश्यकता होगी।उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका अभी एआई मॉडल विकास में सबसे आगे है, उसके बाद चीन आता है, जबकि भारत एप्लाइड एआई पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने भारत सरकार द्वारा सेमीकंडक्टर निर्माण, GPU और डेटा सेंटर में किए जा रहे निवेश को भी सकारात्मक कदम बताया।
सिन्हा के अनुसार, सरकार की तेज़ी, पब्लिक-प्राइवेट साझेदारी और डेटा सेंटर के लिए टैक्स छूट जैसे कदम भारत को वैश्विक एआई आपूर्ति केंद्र बना सकते हैं।

स्वास्थ्य और शिक्षा में एआई योगदान
समिट में लोगों, पर्यावरण और प्रगति जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसमें रोजगार प्रशिक्षण, ऊर्जा की जरूरत और समावेशी विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरी है कि एआई से समाज के सभी वर्गों को लाभ मिले और ग्लोबल साउथ पीछे न रह जाए।
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में एआई की बड़ी भूमिका हो सकती है, लेकिन इसका इस्तेमाल सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से होना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि एआई बहुत सारी जानकारी दे सकता है, लेकिन इसे सही संदर्भ और गहराई से समझाने का काम पत्रकारिता ही कर सकती है।
नई दिल्ली में होने वाला एआई इम्पैक्ट समिट दुनिया भर की सरकारों, टेक कंपनियों और शोधकर्ताओं को एक मंच पर लाएगा। ऐसे समय में जब दुनिया एआई के नियम, ऊर्जा खपत और सामाजिक प्रभावों पर बहस कर रही है, भारत खुद को एप्लाइड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।






