Australia: ऑस्ट्रेलिया में यहूदियों पर अतंकियों का हमला हुआ, जिसमें 12 की मौत हुई। सिडनी के बोंडी बीच में हनुक्का त्यौहार मना रहे सैकडों यहूदियों ने सोचा भी नहीं था कि उनके बीच से उनके प्यारे लोग, उनसे अचानक इस दुनिया से बिछड़ जायेंगे। यहूदियों पर ऐसा हमला एक बार उनके आलंपिक खिलाड़ियों को मार कर भी हुआ है। यह घटना 1972 के आलंपिक खेलों के दौरान म्यूनिख में हुई थी। यह इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है। 5 सितंबर को फिलिस्तीनी आतंकवादियों ने आलंपिक गांव में घुसकर 9 इजरायली खिलाड़ियों को बंधक बनाकर दो की हत्या कर दी थी। यह दिन ब्लैक सितंबर से याद किया जाता है।
दुनिया में आतंकी जिस तरह से आतंक फैलाकर गंदा माहौल फैला रहे हैं, वह मानवीय व्यवहार नही है। न हि इसके द्वारा कोई शांति का स्थाई हल हैै।
देखें तो पता चलता है-पाकिस्तान इस आतंकी कारखाने का जिम्मेदार है। कल की यहूदियों पर हुई आतंकी घटना में पाकिस्तान का भी हाथ है।
भारत पर पाकिस्तान हर बार छद्म युद्ध से जीतने की कोशिश में रहा है। 13 दिसंबर 2001 का संसद पर किया गया पाकिस्तान का हमला कभी भूला नहीं जा सकता। इस हमले के द्वारा भारत के लोकतंत्र को सबक सिखाने का उसका प्रयास था, क्योंकि जब से पाकिस्तान का निर्माण हुआ, तब से पाकिस्तान ने लोकतंत्र की प्रणाली को नहीं अपनाया। जब कोशिश हुई, तब उसको वहां छिन्न-भिन्न किया गया, लोकतंत्र प्रिय तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अलि भुट्टो को मौत के घाट उतार दिया गया था।
जिस देश की बुनियाद अलोकतांत्रिक ढ़ग से पड़ी है, वह पड़ौसी भारत को चैन से विकास के रास्ते से हटाने की कोशिश में रहता है। आतंकवाद को गले लगाकर पाकिस्तान अपपना भला तो किसी भी तरह से नही ंकर सकता। पाकिस्तान की अपनी कोई ठोस अर्थव्यवस्ता नहीं है; आईएमएफ से लगातार कर्जा लेकर देश चल रहा है। इसके बावजूद भारत के साथ मधुर संबंध बनाने का उसका इरादा नहीं है। एक पड़ौसी -जैसा मधुर व्यवहार वाला रवैया अपनाना नहीं चाहता। जबकि वास्तविकता के साथ विकास का रास्ता पकड़ता, तो एशिया के इस उपमहाद्वीप की तस्वीर संपन्न देशों में होती। आतंकवाद कभी भी विकास का रास्ता नहीं हो सकता, इस बात को इन आतंकवादियों की जेहन में होना चाहिए।
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