Avimukteshwaranand: प्रयागराज में माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या के स्नान पर्व पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शोभायात्रा रोके जाने से उपजा विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है।
शंकराचार्य पदनाम को लेकर नोटिस
मेला प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय में ज्योतिषपीठ शंकराचार्य पद को लेकर सिविल अपील विचाराधीन है और वर्ष 2022 में कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। ऐसे में अभी कोई भी व्यक्ति स्वयं को ज्योतिषपीठ शंकराचार्य के रूप में घोषित नहीं कर सकता। इसके बावजूद मेला क्षेत्र में लगाए गए शिविर के बोर्ड पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ लिखा गया है। प्राधिकरण ने इसे अदालत के आदेश की अवहेलना मानते हुए 24 घंटे के भीतर संशोधन करने और कारण बताने को कहा है।
Avimukteshwaranand: तीन दिन से धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
दूसरी ओर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने और शिष्यों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार के विरोध में पिछले तीन दिनों से मेला प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक प्रशासन सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगता, वे अपने आश्रम में नहीं जाएंगे और शिविर के बाहर ही रहेंगे।
प्रशासन क्या कहता है?
माघ मेला प्रशासन की ओर से सौम्या अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान से रोका नहीं गया था, बल्कि सुरक्षा कारणों से पहिया लगी पालकी को संगम नोज तक ले जाने पर आपत्ति जताई गई थी। मौनी अमावस्या के दिन संगम क्षेत्र में भारी भीड़ थी और पालकी के साथ आगे बढ़ने से भगदड़ या किसी अनहोनी की आशंका थी।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
गौरतलब है कि रविवार को मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर से पहिया लगी पालकी पर सवार होकर शिष्यों के साथ संगम जाने निकले थे। इसी दौरान पुलिस ने उनकी शोभायात्रा को रोक दिया। इसे लेकर पुलिस और शिष्यों के बीच कहासुनी हुई, जो बाद में झड़प में बदल गई। शिष्यों ने पुलिस पर अभद्रता और मारपीट का आरोप लगाया, जबकि पुलिस का कहना है कि शिष्यों ने बैरिकेडिंग तोड़ी। इस मामले में शिष्य प्रत्यक्षचैतन्य मुकुंदानंद गिरि समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया है।
जबकि इस विवाद पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि इतिहास में जब भी शंकराचार्य स्नान के लिए गए हैं, वे पालकी में ही गए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने संकल्प लिया है कि वे हर मेले में प्रयागराज आएंगे, लेकिन शिविर में नहीं रुकेंगे और फुटपाथ पर ही व्यवस्था करेंगे। वहीं उनके मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पिछले एक दिन से भोजन नहीं किया है और कोई प्रशासनिक अधिकारी उनसे मिलने नहीं आया।
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