Bangladesh News: बांग्लादेश में आगामी चुनावों को लेकर राजनीति में धर्म के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (टीआईबी) के अध्ययन के मुताबिक, देश में लोकतांत्रिक राजनीतिक माहौल की कमी और धार्मिक कट्टरता के कारण राजनीतिक दल चुनावी लाभ के लिए धर्म का खुलकर उपयोग कर रहे हैं।
धार्मिक हथकंडों का असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनावों में कुछ दल “जन्नत का टिकट” देने जैसे वादों के जरिए समर्थन जुटा रहे हैं, जबकि कुछ इस्लामी कानूनों के लागू होने का संदेश देकर वोट मांगते हैं। पुरुष नेता धार्मिक टोपी पहनकर और महिलाएं दुपट्टा या सिर ढककर मंच पर आती हैं। टीआईबी का अध्ययन बताता है कि धर्म आधारित राजनीतिक गतिविधियां अब 1991 के चुनावों से लगातार बढ़ रही हैं, और बीएनपी तथा अवामी लीग दोनों इसमें शामिल हैं।
Bangladesh News: इस्लामी दलों की बढ़ती हिस्सेदारी
फरवरी 2026 के चुनाव में कुल 51 दल भाग ले रहे हैं, जिनमें 1,981 उम्मीदवार हैं। इनमें इस्लामी दलों के उम्मीदवारों की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत है, जो पिछले पांच चुनावों में सबसे अधिक है। 2024 में यह केवल 9.5 प्रतिशत थी और 2018 में 29.66 प्रतिशत। टीआईबी अध्ययन के अनुसार, यह संकेत है कि देश की आंतरिक राजनीति और प्रशासन में इस्लामी गतिविधियों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
राजनीतिक स्थिरता और लोकतंत्र पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि धर्म के राजनीतिक इस्तेमाल से मतदाताओं के निर्णय प्रभावित हो सकते हैं और चुनावी माहौल में सामाजिक विभाजन गहरा सकता है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि इस प्रवृत्ति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया और समाज में स्थिरता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
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