Bangladesh Violence: बांग्लादेश में एक बार फिर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं। कई इलाकों में तोड़फोड़, आगजनी और तनाव की खबरें मिल रही हैं, जिससे आम लोगों में दहशत का माहौल है। इसी के साथ भारत विरोधी प्रदर्शनों में भी तेजी देखी जा रही है। बदलते हालात पर प्रतिक्रिया देते हुए बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि यूनुस के दौर में देश की कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। हिंसा अब आम बात बनती जा रही है। सरकार हालात पर नियंत्रण रखने में नाकाम साबित हो रही है, जिसका खामियाजा आम नागरिकों, खासकर अल्पसंख्यकों को भुगतना पड़ रहा है।
आतंकवादियों को जेल से रिहा किया गया
शेख हसीना ने ई-मेल के जरिए अपने इंटरव्यू में इस्लामी प्रभाव और सुरक्षा मसलों पर चिंता जताते हुए कहा कि मैं इस चिंता को समझती हूं, और बड़ी संख्या में बांग्लादेशी भी ऐसा ही सोचते हैं जो उस सुरक्षित, धर्मनिरपेक्ष देश को पसंद करते हैं जो हम कभी हुआ करते थे। यूनुस ने चरमपंथियों को कैबिनेट जैसे अहम पदों पर बिठा दिया है, जबकि दोषी आतंकवादियों को जेल से रिहा किया गया है, अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों से जुड़े कई ग्रुपों को सार्वजनिक जीवन में भूमिका निभाने की अनुमति दी गई है।
आगे हसीना ने कहा कि यूनुस के बारे में उन्होंने कहा कि वह कोई राजनेता तो हैं नहीं, उन्हें एक जटिल देश चलाने का किसी तरह का अनुभव भी नहीं है। मुझे इस बात का डर है कि कट्टरपंथी लोग उनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक स्वीकार्य चेहरा पेश करने के लिए कर रहे हैं, इसी तरह वे व्यवस्थित रूप से हमारे संस्थानों को अंदर से कट्टरपंथी बना रहे हैं।
पूर्व पीएम ने कहा कि यह स्थिति न केवल भारत के लिए, बल्कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में स्थिरता में निवेश करने वाले हर देश के लिए चिंता की बात होनी चाहिए। बांग्लादेश की राजनीति का धर्मनिरपेक्ष चरित्र हमारी सबसे बड़ी ताकतों में से एक था, और हम इसे कुछ बेवकूफ चरमपंथियों की सनक पर बर्बाद नहीं होने दे सकते।
Bangladesh Violence: हादी की हत्या पर रखी बात
शेख हसीना ने युवा नेता उस्मान हादी की हत्या पर कहा कि यह दुखद हत्या उस कानून-व्यवस्था की कमी को भी दिखाती है जिसने मेरी सरकार को हटा दिया था और यूनुस के राज में यह और बढ़ गई है। वहां पर हिंसा आम बात हो गई है, जबकि अंतरिम सरकार या तो इसे मानने से इनकार करती है या इसे रोक पाने में नाकाम रही है। इस तरह की घटनाएं बांग्लादेश को अंदर से अस्थिर करती हैं, साथ ही हमारे पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को भी खराब करती हैं।
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