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बर्धमान-दुर्गापुर का बड़ा सियासी झटका! टीएमसी ने 6 सीटें अपनी तरफ की, भाजपा सिर्फ 1 पर सिमटी

Bardhaman Durgapur analysis: बर्धमान-दुर्गापुर का राजनीतिक समीकरण बेहद दिलचस्प माना जाता है। 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आए इस संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं का रुझान समय के साथ बदलता रहा है। यहां का वोटर किसी एक विचारधारा से बंधा नहीं है, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार सत्ता का रुख बदल देता है।

कभी वामपंथ का अभेद्य किला

2009 के लोकसभा चुनाव में यह क्षेत्र भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का मजबूत गढ़ माना जाता था। उस समय पूरे राज्य में ममता बनर्जी  की लहर के बावजूद वामपंथ ने यहां अपनी पकड़ बनाए रखी थी।

Bardhaman Durgapur analysis: 2014 में टीएमसी का कब्जा

2014 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की लहर ने इस ‘लाल किले’ को ढहा दिया और टीएमसी ने पहली बार इस सीट पर जीत दर्ज की।

2019 में भाजपा की एंट्री

2019 के चुनाव में राष्ट्रवाद और सत्ता विरोधी लहर के बीच भाजपा  ने यहां जीत दर्ज की। भाजपा के एस. एस. अहलूवालिया ने मात्र 2,439 वोटों के अंतर से टीएमसी उम्मीदवार को हराया।

Bardhaman Durgapur analysis: 2024 में टीएमसी की जोरदार वापसी

2024 के लोकसभा चुनाव में कहानी फिर बदली और टीएमसी ने 1.37 लाख से अधिक वोटों के अंतर से शानदार जीत हासिल की। पार्टी के उम्मीदवार कीर्ति आजाद ने भाजपा के उम्मीदवार दिलीप घोष को हराया।

7 विधानसभा सीटों में छिपा है असली गणित

इस लोकसभा क्षेत्र में कुल 7 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें 5 ग्रामीण (पूर्व बर्धमान) और 2 शहरी/औद्योगिक (पश्चिम बर्धमान) क्षेत्र शामिल हैं।

टीएमसी के कब्जे वाली सीटें:

बर्धमान दक्षिण – विधायक: खोकन दास

मोंटेश्वर – विधायक: सिद्दीकुल्लाह चौधरी

बर्धमान उत्तर (एससी) – विधायक: निशिथ कुमार मलिक

भातर – विधायक: मांगोबिंद अधिकारी

गलसी (एस.सी.)-निर्माता: नेपाल घोरुई

दुर्गापुर पूर्व विधायक: प्रदीप मजूमदार

भाजपा की इकलौती सीट:

दुर्गापुर पश्चिम – विधायक: लक्ष्मण चंद्र घोरुई

इस तरह 7 में से 6 सीटों पर टीएमसी का कब्जा है, जबकि भाजपा सिर्फ एक शहरी सीट तक सीमित है।

Bardhaman Durgapur analysis: कल्याणकारी योजनाओं का बड़ा असर

2024 के चुनाव में टीएमसी ने राज्य सरकार की योजनाओं को बड़ा मुद्दा बनाया। खासतौर पर ‘लक्ष्मी भंडार’, ‘स्वास्थ्य साथी’ और ‘खाद्य साथी’ जैसी योजनाओं को लेकर जनता के बीच समर्थन जुटाया गया। विश्लेषकों का मानना है कि इन योजनाओं ने चुनावी परिणामों पर बड़ा असर डाला और टीएमसी को इस सीट पर मजबूत जीत दिलाई।

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