Bareilly Bulldozer Action: बरेली में सपा नेता सरफराज वली के मैरिज हॉल पर पिछले तीन दिनों से चल रही बुलडोजर कार्रवाई गुरुवार को अचानक रुक गई। वजह बना सुप्रीम कोर्ट का वह आदेश, जिसमें ध्वस्तीकरण पर तत्काल रोक लगा दी गई और कहा गया कि मामला पहले हाईकोर्ट में सुना जाए। आदेश मिलते ही BDA टीम, पुलिस और PAC फोर्स मौके से हटती दिखी और इलाके में तीन दिन से बना तनाव धीरे-धीरे कम होने लगा। यह पूरी कार्रवाई सोमवार से शुरू होनी थी, लेकिन फोर्स कम होने के कारण उस दिन ऑपरेशन टाल दिया गया। मंगलवार सुबह जैसे ही पुलिस और PAC की पूरी टुकड़ी मिली, BDA ने दोनों मैरिज हॉलों पर तोड़फोड़ की शुरुआत की। मो. राशिद के गुड मैरिज हॉल का फ्रंट हिस्सा और फसाड बुधवार तक पूरी तरह ध्वस्त किया जा चुका था, जबकि सरफराज़ वली के ऐवान-ए-फरहत की बाउंड्री और प्रवेश द्वार को गुरुवार सुबह तक मलबे में बदल दिया गया। दोनों इमारतों का कुल 40% भाग ढहा दिया गया था।
छावनी में तब्दील हुआ इलाका
इन इमारतों की उपरी मंज़िलों पर कुल 50 लोग रहते थे। जैसे ही बुलडोजर आगे बढ़ा, महिलाएँ रोते-बिलखते बाहर आईं, बच्चे सामान समेटते दिखे और परिवारों में दहशत फैल गई। बुधवार को विरोध बढ़ते ही प्रशासन ने गुरुवार सुबह पूरी जगह को छावनी में बदल दिया। PAC की दो अतिरिक्त कंपनियाँ तैनात की गईं, मुख्य रास्ते बंद किए गए और आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई। गुड मैरिज हॉल 700 वर्ग गज का है और लगभग 8 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जबकि ऐवान-ए-फरहत 1000 वर्ग गज में बना है और जिसकी अनुमानित कीमत 10 करोड़ रुपये बताई जाती है। इतने बड़े ढांचे का आधा हिस्सा तीन दिनों में जमींदोज होने से स्थानीय लोगों में भी नाराज़गी दिखी। BDA का दावा था कि दोनों मैरिज हॉल अवैध निर्माण हैं और इनके खिलाफ पहले नोटिस दिया गया था। वहीं सपा नेताओं का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की गई है। सरफराज़ वली ने कहा कि हमें सुने बिना घर उजाड़ दिया गया। यह कानून का नहीं, सियासत का बुलडोजर है।
Bareilly Bulldozer Action: सुप्रीम कोर्ट की एंट्री से बदला पूरा मामला
पुलिस इसे तौकीर रज़ा से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई का हिस्सा बता रही है तौकीर रज़ा पर हत्या की साजिश, दंगा भड़काने, पुलिस पर हमला और पेट्रोल बम फेंकने जैसे 10 गंभीर केस दर्ज हैं। मो. राशिद और सरफराज़ वली दोनों को उनका करीबी माना जाता है। प्रशासन की लाइन साफ थी शहर में दंगा फैलाने की कोशिश करने वालों और उनके नेटवर्क पर नकेल कसी जा रही है। इसी वजह से कार्रवाई लगातार तेज़ होती जा रही थी। लेकिन गुरुवार दोपहर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट आदेश दिया कि फिलहाल कोई ध्वस्तीकरण नहीं होगा पूरा मामला हाईकोर्ट में उठाया जाए। यह आदेश आते ही तीन दिनों से गूंजती बुलडोजर की आवाज़ अचानक थम गई। PAC हटने लगी, टीमों ने मशीनें समेट लीं और पूरा इलाका राहत की सांस लेने लगा। अब असली लड़ाई हाईकोर्ट में होगी जहाँ तय होगा कि ये निर्माण सच में अवैध थे या फिर राजनीतिक टारगेटिंग की वजह से तीन दिनों तक करोड़ों की संपत्ति पर बुलडोजर चला।
लेखक: निशी शर्मा
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