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‘परिवर्तन यात्रा’ से बंगाल की सियासत में हलचल, ग्राउंड पर दिखी अलग तस्वीर

Bengal Elction 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने राज्यभर में करीब 5 हजार किलोमीटर लंबी ‘परिवर्तन यात्रा’ निकाली। यह यात्रा 1 और 2 मार्च को अलग-अलग हिस्सों से शुरू होकर 14 मार्च को कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा के साथ समाप्त हुई। भाजपा का दावा है कि इस यात्रा के जरिए पार्टी राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 237 तक पहुंची। हालांकि ग्राउंड पर तस्वीर हर जगह एक जैसी नहीं दिखी। कुछ इलाकों में भीड़ और उत्साह नजर आया, जबकि कई जगहों पर रैलियों में अपेक्षाकृत कम लोग पहुंचे।

पुरुलिया में कम भीड़, लेकिन बदलाव की उम्मीद

7 मार्च को जब यात्रा पुरुलिया जिले के रघुनाथपुर इंडस्ट्रियल एरिया पहुंची तो यहां आम लोगों की भीड़ कम दिखाई दी। दिलचस्प बात यह है कि यह सीट भाजपा के पास है और इलाके में हिंदी भाषी व आदिवासी आबादी अच्छी-खासी है।

रास्ते में मिले अवधेश राम रैली में शामिल नहीं हुए, लेकिन राज्य में सरकार बदलने की इच्छा जरूर जताते हैं। उनका कहना है कि उन्हें सरकारी आवास मिलने की उम्मीद थी, कई बार जांच भी हुई, यहां तक कि BDO भी आए, लेकिन घर नहीं मिला। वे कहते हैं कि अगर बंगाल में भी डबल इंजन सरकार बनेगी तो गरीबों को फायदा मिलेगा और उन्हें प्रधानमंत्री मोदी पर भरोसा है।

Bengal Elction 2026: दक्षिण बंगाल में डर और सियासी तनाव की चर्चा

रैली में शामिल स्थानीय कार्यकर्ता ज्योति सिंह का कहना है कि कई जगह विपक्षी कार्यक्रमों को अनुमति नहीं मिलती। उनके मुताबिक यहां हालात ऐसे हैं कि लोग भाजपा को वोट तो देते हैं, लेकिन खुलकर समर्थन जताने से डरते हैं। वहीं रैली के स्थानीय आयोजक दिलीप कुमार सिंह भीड़ कम होने को यात्रा की लंबाई से जोड़ते हैं। उनका कहना है कि लोग रास्ते में अलग-अलग जगहों पर खड़े होकर समर्थन दे रहे हैं और पार्टी को 165 सीटों का लक्ष्य दिया गया है।

Bengal Elction 2026
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उत्तर बंगाल में दिखा ज्यादा उत्साह

इसके उलट उत्तर बंगाल के इलाकों में यात्रा के दौरान अच्छी भीड़ देखने को मिली। जलपाईगुड़ी में सभा के दौरान बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधारी ने सिंडिकेट राज और घुसपैठ का मुद्दा उठाया। माल विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले दीपक विश्वास कहते हैं कि रविवार को चाय बागानों में काम करने वालों को डबल भुगतान मिलता है, इसके बावजूद लोग रैली में आए हैं, इससे बदलाव की इच्छा का अंदाजा लगाया जा सकता है। कुछ लोगों ने भ्रष्टाचार और रोजगार की कमी को भी सरकार बदलने की वजह बताया।

Bengal Elction 2026: राजनीतिक विश्लेषकों की राय

आसनसोल के वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि दक्षिण बंगाल में कम भीड़ की एक वजह राजनीतिक तनाव और कार्यकर्ताओं पर हमलों की घटनाएं भी हैं। उनका कहना है कि लोग खुलकर सामने आने से बचते हैं, लेकिन चुनाव के समय इसका असर दिख सकता है।

वहीं राजनीतिक विश्लेषक मेदुल इस्लाम का कहना है कि बंगाल की राजनीति में जीत का रास्ता दक्षिण बंगाल से तय होता है। उत्तर बंगाल में भाजपा मजबूत जरूर है, लेकिन राज्य की सत्ता तक पहुंचने के लिए नॉर्थ 24 परगना और साउथ 24 परगना जैसे क्षेत्रों में पकड़ बनाना जरूरी होगा, जहां अब भी टीएमसी का प्रभाव ज्यादा है।

टीएमसी ने साधा निशाना

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजु दत्ता ने यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा की सभाओं में अपेक्षित भीड़ नहीं दिखी और पार्टी बाहरी कार्यकर्ताओं के सहारे माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।

Bengal Elction 2026:  क्या चुनाव में पड़ेगा असर?

विश्लेषकों का मानना है कि यात्रा का सबसे बड़ा मकसद कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना और संगठन को सक्रिय करना है। इससे वोट शेयर पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन बंगाल की सत्ता का फैसला अंततः दक्षिण बंगाल के राजनीतिक समीकरण ही तय करेंगे।

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