Bengal Election: कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राजधानी के सबसे चर्चित और वीआईपी विधानसभा क्षेत्र भबानीपुर पर सियासी नजरें टिक गई हैं। यह वही सीट है, जिसने हर मुश्किल घड़ी में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का राजनीतिक रास्ता आसान किया है। तृणमूल कांग्रेस का यह गढ़ एक बार फिर पूरे राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
भबानीपुर: इतिहास, विरासत और पहचान
कोलकाता नगर निगम के आठ वार्डों में फैला भबानीपुर (भवानीपुर) केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि बंगाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। इस क्षेत्र का नाता नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चित्तरंजन दास, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सत्यजीत रे और गुरु दत्त जैसी महान हस्तियों से जुड़ा रहा है। कालीघाट मंदिर और नेताजी भवन आज भी इस विरासत की गवाही देते हैं।
Bengal Election: टीएमसी का अजेय गढ़ और ममता फैक्टर
2011 के बाद से भबानीपुर में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा कायम है। 2011 और 2021 दोनों उपचुनावों में यह सीट ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने की राह बनी। कभी सुब्रत बख्शी तो कभी सोवनदेब चटर्जी ने जीत के बाद सीट खाली कर ममता के लिए रास्ता साफ किया। इससे पहले दशकों तक कोई भी पार्टी यहां लगातार दो बार जीत दर्ज नहीं कर पाई थी।
2026 में क्या बदलेंगे समीकरण?
भबानीपुर की अर्थव्यवस्था पारंपरिक व्यापार, आधुनिक रिटेल, शिक्षा संस्थानों और सेवा क्षेत्र पर आधारित है। साथ ही ईडन गार्डन्स, पार्क स्ट्रीट और विक्टोरिया मेमोरियल जैसे प्रतिष्ठित स्थानों की नजदीकी इसे और खास बनाती है। 2026 के चुनाव में सबसे बड़ा सवाल यही है कि ममता बनर्जी खुद यहां से मैदान में उतरेंगी या किसी भरोसेमंद सिपहसालार को मौका देंगी। जवाब जो भी हो, भबानीपुर एक बार फिर बंगाल की राजनीति का केंद्र बनने जा रहा है।
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