Mobile Charger: आज के समय में मोबाइल हर व्यक्ति के लिए एक महत्वपूर्ण वस्तु बन गई है। इससे हमारे कई सारे काम बहुत सरलता से बस कुछ ही मिनटों में हो जाते है। आपको किसी से बात करना हो, कुछ जानना हो, कुछ सीखना हो या फिर मनोरंजन करना हो यह सभी काम मोबाइल चुटकियों में कर देता हैं। भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने हाल ही में एक सर्वे किया जिसके मुताबिक, भारत के 85.5% परिवारों के पास कम से कम एक स्मार्टफोन मौजूद है।
नकली चार्जर से बचें और फोन को सुरक्षित रखें
मोबाइल का इस्तेमाल करने के लिए जो सबसे ज्यादा जरूरी होता है वो है उसका चार्जर, इसके बिना मोबाइल किसी डब्बे से अधिक कुछ नहीं होता है। इसीलिए मोबाइल के लिए अच्छा चार्जर होना बहुत आवश्यक होता है। लेकिन क्या हो अगर ये चार्जर ही नकली निकले और मोबाइल खराब करने का कार्य करने लगे।आज के समय में बाजार में कई सारे नकली चार्जरों की भरमार देखने को मिलती है। ये सभी चार्जर दिखाने में तो किसी असली चार्जर जैसी ही लगते हैं, लेकिन इन चार्जरों की क्वालिटी बहुत खराब होती है। क्योंकि इनमें बेकार कंपोनेंट्स, गलत वोल्टेज, कमजोर वायरिंग और खराब मटीरियल का उपयोग किया जाता है।

इस तरह के नकली चार्जर न सिर्फ आपके मोबाइल को बहुत बुरा नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि कई बार इस चार्जरों की वजह से फोन में आग लगने, बैटरी फटने, फोन का ओवरहीट होना और करंट लगने जैसे खतरे बढ़ जाते हैं। इसलिए असली और नकली चार्जर में अंतर पहचानना बेहद जरूरी है।
Mobile Charger: नकली चार्जर के खतरे जानें
बाजार ने मौजूद नकली चार्जर में सुरक्षा मानकों का ध्यान नहीं रखा जाता। इससे आपका फोन ओवरहीट हो सकता है, बैटरी खराब हो सकती है या मोबाइल अचानक फट भी सकती है। नकली चार्जर का इस्तेमाल करने से शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा हमेशा रहता है। यही नहीं कई बार करंट लगने से गंभीर हादसे भी हो सकते हैं।
असली चार्जर की पहचान कैसे करें?
1. वजन: आप किसी चार्जर के वजन से उसके असली होने का पता लगा सकते है। दरअसल, असली चार्जर का वजन नकली की तुलना में थोड़ा ज्यादा होता है। क्योंकि असली चार्जर में अच्छे और मजबूत कंपोनेंट्स होते हैं।
2. फिनिशिंग और बनावट: असली चार्जर चिकना, मैट और एकसमान होता है। नकली चार्जर चमकीला और असमान दिखता देता है। इससे भी आप दोनों तरह ने फर्क का पता लगा सकते है।
3. प्लग पिन: असली चार्जर में तीनों पिन सही तरीके से फिट होते हैं। नकली चार्जर में पिन ढीले या टेढ़े हो सकते हैं।
4. मार्किंग और टेक्स्ट: असली चार्जर पर BIS मार्क और सेफ्टी साइन स्पष्ट और साफ होते हैं। नकली चार्जर में ये धुंधले या गायब होते हैं।
5. चार्जर के सिंबल का मतलब: चार्जर पर बने सिंबल यह दिखाते हैं कि यह सुरक्षित है और मानक के अनुसार बना है।

नकली चार्जर की पहचान सरकारी ऐप से
अब आप नकली चार्जर की पहचान सरकारी ऐप की मदद से भी कर सकते है। BIS CARE ऐप में चार्जर का CRS नंबर डालकर असली या नकली चार्जर की जांच की जा सकती है। अगर चार्जर रजिस्टर्ड नहीं होता है, तो आपके पास मौजूद चार्जर नकली है।
- मोबाइल चार्जर खरीदते समय ध्यान रखें
- जब भी आप किसी मोबाइल के लिए अलग से चार्जर खरीदें तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए
- केवल कीमत पर ध्यान न दें, सुरक्षा और प्रमाणिकता देखें।
- हमेशा ब्रांडेड या ऑथराइज्ड स्टोर से चार्जर खरीदें।
- पैकिंग पर BIS मार्क, मॉडल, बैच नंबर और साफ प्रिंटिंग देखें।
- बहुत सस्ते या बिना ब्रांड वाले चार्जर न खरीदें।
- चार्जर का वोल्टेज और आउटपुट फोन के अनुसार होना चाहिए।

Mobile Charger: मोबाइल चार्ज करते समय सावधानियां
अपने मोबाइल की तरह ही अपने चार्जर का ध्यान रखना चाहिए और कोशिश करना चाहिए कि हमेशा ओरिजिनल चार्जर ही इस्तेमाल करें। जब आप अपने फोन को चार्ज कर रहे हो तो चार्जिंग के दौरान फोन का इस्तेमाल न करें। फोन को तकिए या कपड़े पर न रखें, गर्मी फंसने से फटने की संभावना होती है। जैसे ही फोन पूरा चार्ज हो जाए है तुरंत प्लग निकाल दें। गीले हाथों से चार्जर या फोन को न छूने से बचें। कटे या खराब केबल का इस्तेमाल न करें। चार्जिंग पोर्ट और पिन साफ रखें। फोन को बाहर या खुले स्थान में चार्ज न करें। रातभर चार्जर लगे न रहने दें। बैटरी चार्जिंग प्रतिशत 30% से 80% के बीच रखें। ओवरचार्जिंग से बचें और बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज न होने दें।
ये भी पढ़े…विश्व ध्यान दिवस 2025: 5R रूल से पाएँ सुकून और संतुलन, मानसिक शांति और स्ट्रेस से राहत के आसान तरीके







