Bihar News: भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड के हरिनकोल पंचायत अंतर्गत स्थित छोटी दिलौरी प्राथमिक विद्यालय आज भी अपने स्थापना के लगभग 30 वर्षों बाद बुनियादी सुविधाओं के अभाव में झेल रहा है। विद्यालय तक पहुंचने के लिए आज तक एक भी पक्की सड़क का निर्माण नहीं हुआ है, जिससे बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को हर मौसम में जोखिम भरे सफर से गुजरना पड़ता है।
जोखिम भरा सफर, हर मौसम में मुश्किलें
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात या बाढ़ के दौरान स्कूल तक पहुंचना बच्चों के लिए खतरनाक हो जाता है। कीचड़ भरी पगडंडियों और खेतों से गुजरते हुए बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं, उनके कपड़े गंदे हो जाते हैं और चोट लगने की घटनाएं आम हो गई हैं। इसके बावजूद शिक्षा की लगन बच्चों को हर दिन इस जोखिम भरे रास्ते से गुजरने पर मजबूर करती है। स्थानीय लोग बताते हैं कि वर्षों में सरकारें बदलीं, मुखिया और जनप्रतिनिधि बदले, लेकिन छोटी दिलौरी गांव और स्कूल की तस्वीर में कोई सुधार नहीं हुआ। सैकड़ों परिवार सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से आज भी वंचित हैं। विद्यालय में पीने के लिए सरकारी चापाकल मौजूद है, लेकिन इससे अत्यधिक आयरन युक्त पानी निकलता है। मजबूरी में बच्चे वही पानी पीते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना बनी रहती है।
Bihar News: टूटी चारदीवारी और असामाजिक गतिविधियां
विद्यालय की चारदीवारी पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि इसका फायदा उठाकर रात में असामाजिक तत्व स्कूल परिसर में प्रवेश कर लेते हैं। शौचालयों में तोड़फोड़ की जाती है, गंदगी फैलाई जाती है और गुटखा खाने जैसी आदतों से परिसर अस्वच्छ हो जाता है। इन हालातों में बच्चों को कई बार शौचालय के लिए स्कूल से बाहर जाना पड़ता है, जो सुरक्षा और स्वच्छता दोनों के लिहाज से चिंताजनक है।
शिक्षकों की दो टूक मांग
विद्यालय के शिक्षक सुनील कुमार यादव, बरुण पासवान और शिक्षिका श्रेया चौधरी ने प्रशासन से स्पष्ट मांग की है कि स्कूल की मजबूत चारदीवारी का निर्माण कराया जाए। स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय उपलब्ध कराए जाएं। बच्चों को स्कूल परिसर से बाहर नहीं जाना पड़े, ताकि पढ़ाई का माहौल सुरक्षित बन सके। स्थानीय ग्रामीण नीरो देवी, पंकज यादव, धर्मेश यादव, दिलीप यादव, अखिलेश यादव और पप्पू कुमार का कहना है कि शिक्षिका श्रेया चौधरी के पदस्थापन के बाद स्कूल में रौनक लौट आई है। बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है और पढ़ाई का स्तर बेहतर हुआ है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने स्कूल में बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
ग्रामीण और शिक्षक जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग कर रहे हैं कि विद्यालय तक तत्काल पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। बच्चों को शुद्ध पेयजल, मजबूत चारदीवारी और सुरक्षित शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
Report BY: शयामानंद सिह
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