Bihar news: बिहार के गया जिले के वार्ड संख्या 34 से सरकारी लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां वार्ड पार्षद शीला देवी को प्रखंड कार्यालय के अधिकारियों ने कागज़ों में ही मृत घोषित कर दिया। हैरानी की बात यह है कि शीला देवी पूरी तरह जीवित हैं और खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। वार्ड पार्षद शीला देवी ने बताया कि पति की मौत के बाद वह विधवा पेंशन का लाभ ले रही थीं। लेकिन कुछ समय पहले अचानक उनके बैंक खाते में पेंशन की राशि आनी बंद हो गई। जब इसकी वजह जानने के लिए वह प्रखंड कार्यालय पहुंचीं, तो उन्हें KYC कराने को कहा गया।
KYC कराने पहुंचीं तो पता चला, रिकॉर्ड में मृत घोषित हैं
KYC प्रक्रिया के दौरान शीला देवी के होश उड़ गए। सरकारी रिकॉर्ड में पेंशन बंद करने का कारण यह दर्ज था कि जांच में लाभुक की मृत्यु हो चुकी है। जबकि हकीकत यह है कि वह न सिर्फ जीवित हैं, बल्कि एक निर्वाचित वार्ड पार्षद भी हैं।
Bihar news: खुद को जिंदा साबित करने में जुटीं वार्ड पार्षद
शीला देवी ने इस पूरे मामले को घोर लापरवाही बताया है। उनका कहना है कि बिना मौके पर जांच किए, घर बैठे ही रिपोर्ट तैयार कर दी गई, जिसके कारण उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने मांग की है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पेंशन गबन का भी आरोप
Bihar news: इस मामले को लेकर वार्ड पार्षद प्रतिनिधि ओम यादव ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जब एक जीवित वार्ड पार्षद को ही मृत घोषित किया जा सकता है, तो आम लाभुकों की स्थिति क्या होगी। उन्होंने आशंका जताई कि इस तरह की लापरवाही के जरिए कई अधिकारियों द्वारा पेंशन की राशि का गबन किया जाता है। इस मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है।
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