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BMC Election 2026: मुंबई की सत्ता पर निर्णायक मुकाबला, आज थमेगा प्रचार, मुंबई की सत्ता पर आख़िरी सियासी दांव

बीएमसी चुनाव को लेकर मुंबई में सियासी सरगर्मी चरम पर है। 15 जनवरी को होने वाले मतदान से पहले आज प्रचार का आखिरी दिन है। 227 वार्डों में करीब 1700 उम्मीदवार मैदान में हैं। यह चुनाव सिर्फ नगर निगम का नहीं, बल्कि मुंबई की सत्ता और महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। शिंदे गुट, उद्धव ठाकरे, बीजेपी, कांग्रेस और एनसीपी के लिए यह प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुकी है।
मुंबई नगर निगम चुनाव का सियासी मुकाबला

BMC Election 2026: महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों में 15 जनवरी को मतदान होना है और आज प्रचार का आखिरी दिन है। सिर्फ बीएमसी (बृहन्मुंबई नगर निगम) में ही 227 वार्डों पर करीब 1700 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। चुनाव परिणाम 16 जनवरी को घोषित किए जाएंगे। बीएमसी के मौजूदा पार्षदों का कार्यकाल मार्च 2022 में समाप्त हो गया था। इसके बाद से निगम का संचालन प्रशासकों द्वारा किया जा रहा है। दरअसल, ये चुनाव फरवरी 2022 में होने थे, लेकिन अलग-अलग कारणों से लगातार टलते रहे।

किन नगर निगमों में होगा चुनाव

मुंबई के अलावा उल्हासनगर, ठाणे, नवी मुंबई, मीरा-भायंदर, पनवेल, कल्याण-डोंबिवली, भिवंडी-निजामपुर, सांगली-मिराज-कुपवाड, वसई-विरार, नासिक, मालेगांव, अहिल्यानगर, जलगांव, कोल्हापुर, धुळे, पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, सोलापुर, इचलकरंजी, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़-वाघाला, परभणी, जालना, लातूर, अमरावती, अकोला, नागपुर और चंद्रपुर में भी चुनाव हो रहे हैं।

BMC Election 2026: मुंबई नगर निगम चुनाव का सियासी मुकाबला
मुंबई नगर निगम चुनाव का सियासी मुकाबला

BMC Election 2026: शिंदे बनाम उद्धव

चुनाव प्रचार के आखिरी दिन से एक दिन पहले उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीएमसी में 25 साल के शासन के दौरान ठाकरे ने मराठी लोगों के लिए क्या किया? गौरतलब है कि 1997 से 2022 तक बीएमसी पर शिवसेना का नियंत्रण रहा। इस बार उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे 20 साल बाद एक साथ आए हैं और मराठी अस्मिता को मुख्य मुद्दा बनाया है। राज ठाकरे ने 2006 में शिवसेना से अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया था।

क्यों अहम है बीएमसी चुनाव

बीएमसी चुनाव सिर्फ नगर निगम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मुंबई की सत्ता पर पकड़ की लड़ाई है। यही वजह है कि बीजेपी, उद्धव ठाकरे गुट, शिंदे गुट, कांग्रेस और एनसीपी सभी इसे प्रतिष्ठा का सवाल मान रहे हैं। बीएमसी का सालाना बजट करीब 74,000 करोड़ रुपये है, जो एशिया के किसी भी नगर निगम से बड़ा है। यह बजट नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, सिक्किम और त्रिपुरा जैसे कई राज्यों के बजट से भी अधिक है। इसी कारण बीएमसी चुनाव को महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे अहम माना जा रहा है।

Written by-Adarsh Kathane

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