Bulandshahr News: आज भी समाज में दहेज प्रथा एक गंभीर समस्या बनी हुई है, जो केवल विवाहों को महंगा बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे महिलाओं के सम्मान और जीवन पर भी गहरा असर पड़ता है। ऐसे में बुलंदशहर से आई एक खबर ने यह दिखा दिया कि बदलाव की शुरुआत व्यक्तिगत फैसलों से भी की जा सकती है। जयपाल सिंह के बेटे विवेक की शादी 11 दिसंबर को तय थी। इसी दिन तिलक का भी कार्यक्रम आयोजित किया गया।
पहले पढ़े मामला…
दरअसल, तिलक के दौरान लड़की पक्ष ने दूल्हे के सामने दहेज की परंपरा के अनुसार 51 लाख रुपये से सजी थाली पेश की। जैसे ही यह थाली विवेक के सामने आई, उन्होंने इसे सम्मानपूर्वक माथे से लगाया और तुरंत वापस कर दिया। इस पर लड़की पक्ष के लोग काफी समझाने लगे कि यह तो रस्म है और इसे बिना पूरा किए विवाह अधूरा माना जाता है। लेकिन विवेक ने साफ शब्दों में कहा कि मैं सिर्फ आपकी बेटी को अपनी पत्नी के रूप में चाहता हूँ, एक रुपया भी दहेज के रूप में नहीं। अंततः विवेक ने रस्म के तौर पर केवल एक चांदी का सिक्का स्वीकार किया और शादी की सारी रस्में बेहद सादगी और गरिमा के साथ पूरी कीं।
वहीं विवेक के इस कदम को परिवार और समाज ने सराहा। शादी में मौजूद लोगों ने इस घटना का वीडियो बनाया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में लोग विवेक और उनके परिवार की हौसला अफजाई कर रहे हैं और इसे समाज में बदलाव की मिसाल बता रहे हैं।
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— ABHI YADAV (@abhiyadav1084) December 12, 2025
Bulandshahr News: विवाह केवल सामाजिक बंधन
विवेक का कहना है कि हम बेटी को सम्मान के साथ अपना रहे हैं, दहेज लेकर नहीं। समाज में बदलाव की शुरुआत खुद से करनी होगी। उनके इस फैसले ने यह स्पष्ट किया कि विवाह केवल एक सामाजिक बंधन है, जिसे सच्चाई, सम्मान और सादगी के साथ निभाया जा सकता है। यह कदम न सिर्फ व्यक्तिगत निर्णय का प्रतीक है, बल्कि समाज में दहेज जैसी कुप्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाने वाला उदाहरण भी है।
इस मामले में यह भी ध्यान देने योग्य है कि विवेक के परिवार का समाजिक दृष्टिकोण भी इसे संभव बनाने में अहम रहा। दूल्हे के फुफेरे भाई और भारतीय किसान यूनियन टिकैत के एनसीआर अध्यक्ष योगेंद्र सिंह ने बताया कि हाल ही में खाप पंचायत में बिना दहेज विवाह करने और विवाह समारोह को सादगी के साथ आयोजित करने की अपील की गई थी। विवेक और उनके परिवार ने उसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए यह ऐतिहासिक फैसला लिया।
वहीं अब बुलंदशहर का यह मामला समाज के लिए प्रेरणा बन गया है। यह दिखाता है कि अगर युवा अपने फैसलों में साहस और नैतिकता दिखाएँ, तो पुरानी और गलत प्रथाओं को जड़ से खत्म किया जा सकता है। विवाह में धन और दहेज की अपेक्षा सच्चा सम्मान, प्यार और सादगी ही असली मूल्य हैं। विवेक के इस फैसले ने साबित कर दिया कि बदलाव की शुरुआत छोटे कदमों से होती है, और समाज की सोच को बदलना संभव है।
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