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1 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा व्रत: भगवान विष्णु की विशेष पूजा का दिन, जानिए शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और व्रत रखने की पूरी विधि

चैत्र पूर्णिमा हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र दिन माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, चंद्रमा को अर्घ्य और दान-पुण्य करने से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि तथा पितरों की कृपा प्राप्त होती है।
पूजा, मुहूर्त और महत्व

Chaitra Purnima Vrat: हिंदू धर्म में पूर्णिमा व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस वर्ष 1 अप्रैल, बुधवार को चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पड़ रही है। धार्मिक मान्यता है कि पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण आभा में दिखाई देता है, इसलिए इस दिन चंद्रमा की पूजा और व्रत रखने से मन को शांति मिलती है, घर में सुख-समृद्धि आती है और पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

पूजा, मुहूर्त और महत्व
पूजा, मुहूर्त और महत्व

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय का समय

दृक पंचांग के अनुसार 1 अप्रैल को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 11 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 39 मिनट पर होगा।वहीं, इस दिन चंद्रमा का उदय शाम 6 बजकर 11 मिनट पर होगा।

तिथियों की बात करें तो चतुर्दशी तिथि सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी।
नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी दोपहर 4 बजकर 17 मिनट तक रहेगा, इसके बाद हस्त नक्षत्र प्रारंभ होगा।योग वृद्धि दोपहर 2 बजकर 51 मिनट तक रहेगा और करण वणिज सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगा।

Chaitra Purnima Vrat: पूजा, मुहूर्त और महत्व
पूजा, मुहूर्त और महत्व

Chaitra Purnima Vrat: पूर्णिमा के दिन के शुभ मुहूर्त

अगर इस दिन पूजा-पाठ या कोई शुभ कार्य करना चाहते हैं तो इन शुभ मुहूर्तों का विशेष महत्व है:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 39 मिनट से 5 बजकर 25 मिनट तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 6 बजकर 38 मिनट से 7 बजकर 1 मिनट तक
  • अमृत काल: सुबह 8 बजकर 48 मिनट से 10 बजकर 28 मिनट तक

इसके अलावा इस दिन दो विशेष योग भी बन रहे हैं।सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर 4 बजकर 17 मिनट से अगले दिन सुबह 6 बजकर 10 मिनट तक रहेगा, जबकि रवि योग सुबह 6 बजकर 11 मिनट से दोपहर 4 बजकर 17 मिनट तक रहेगा।

इन अशुभ समय का रखें ध्यान

शुभ कार्य करते समय अशुभ समय से बचना भी जरूरी माना जाता है।

  • राहुकाल: दोपहर 12 बजकर 25 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक
  • यमगंड: सुबह 7 बजकर 45 मिनट से 9 बजकर 18 मिनट तक
  • गुलिक काल: सुबह 10 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट तक
  • दुर्मुहूर्त: दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 50 मिनट तक

इसके अलावा बुधवार को भद्रा काल भी रहेगा, जो सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शाम 7 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।

पूजा, मुहूर्त और महत्व
पूजा, मुहूर्त और महत्व

Chaitra Purnima Vrat: कैसे करें पूर्णिमा व्रत और पूजा

1 अप्रैल को पूर्णिमा व्रत रखने वाले भक्त सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प ले सकते हैं और पूरे दिन उपवास रख सकते हैं।शाम को चंद्रमा के उदय के समय चंद्र देव को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।

इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ, सत्यनारायण कथा या माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही पूर्णिमा के दिन दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है और जीवन में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है।

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