Child Mental Health: आज के समय में बच्चों की दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। पढ़ाई का दबाव, बदलती जीवनशैली, मोबाइल और इंटरनेट का बढ़ता इस्तेमाल बच्चों के मन पर गहरा असर डाल रहा है।
पहले बच्चे खुलकर खेलते थे, दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताते थे, लेकिन अब उनका ज्यादातर समय स्क्रीन और प्रतिस्पर्धा में बीत रहा है। इसी वजह से बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य आज एक बहुत ही जरूरी विषय बन गया है। मानसिक रूप से स्वस्थ बच्चा ही खुश रहता है, अच्छी तरह सीख पाता है और अपने भविष्य के लिए सही फैसले ले पाता है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि किन बातों का बच्चों के मन पर असर पड़ता है।

माता-पिता का व्यवहार और बच्चों का मन
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की नींव माता-पिता के व्यवहार से बनती है। बच्चा सबसे पहले घर से ही सब कुछ सीखता है। अगर घर का माहौल तनाव भरा हो, माता-पिता अक्सर गुस्से में बात करें या बच्चों की बात न सुनें, तो बच्चे डरने लगते हैं।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार ऐसे बच्चे अपनी भावनाओं को दबाने लगते हैं और खुद को अकेला महसूस करते हैं। इससे आगे चलकर चिंता और आत्मविश्वास की कमी हो सकती है। वहीं, अगर माता-पिता प्यार से बात करें, बच्चों की बात ध्यान से सुनें और गलती पर समझाएं, तो बच्चा खुद को सुरक्षित महसूस करता है। इससे उसका मन शांत रहता है और वह खुलकर सोचने-समझने लगता है।
Child Mental Health: स्कूल का माहौल कैसे बनाता है मानसिक दबाव
स्कूल भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बड़ा असर डालता है। स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बच्चों की दूसरी दुनिया होता है। अगर वहां हर समय नंबरों की दौड़ हो, तुलना की जाए या बहुत सख्त नियम हों, तो बच्चों में असफल होने का डर बैठ जाता है। इसके उलट, अगर स्कूल का माहौल सहयोगी हो और बच्चों को गलती से सीखने का मौका मिले, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक संतुलन बना रहता है।

स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया का असर
आज सोशल मीडिया भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। सोशल मीडिया पर दिखने वाली चमक-दमक बच्चों को खुद की तुलना दूसरों से करने पर मजबूर करती है। जब बच्चे दूसरों को ज्यादा सफल या बेहतर देखते हैं, तो उनके मन में हीन भावना आ सकती है। बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य मजबूत बनाने के लिए घर, स्कूल और समाज—तीनों का सहयोग बहुत जरूरी है।
Written By- Palak Kumari







