Crude Oil Price: मध्य पूर्व में ईरान को लेकर तनाव कम होने की उम्मीद के कारण मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से नीचे आ गई, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में कुछ राहत देखने को मिली।ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स की कीमत 6.51 डॉलर यानी करीब 6.6 प्रतिशत गिरकर 92.45 डॉलर प्रति बैरल रह गई। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी 6.12 डॉलर यानी लगभग 6.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 88.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
होर्मुज मार्ग पर अमेरिका की चेतावनी
तेल की कीमतों में यह गिरावट अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान के बाद देखने को मिली। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का अभियान “बहुत जल्द” खत्म हो सकता है। ट्रंप के अनुसार, इस अभियान की सफलता तब मानी जाएगी जब तेहरान के पास ऐसे हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं बचेगी जो अमेरिका, इजरायल या उनके सहयोगी देशों के लिए खतरा बन सकें।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित करने की कोशिशों के खिलाफ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह समुद्री मार्ग सुरक्षित रहेगा क्योंकि वहां अमेरिकी नौसेना के कई जहाज तैनात हैं।

Crude Oil Price: तेल व्यापार का अहम समुद्री रास्ता
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री रास्ता है। इसे दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी क्षेत्र के कई तेल उत्पादक देशों का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से निर्यात किया जाता है। इसलिए अगर इस मार्ग पर किसी तरह का खतरा पैदा होता है, तो उसका असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है।
इससे पहले इसी महीने की शुरुआत में अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के ठिकानों पर बड़े सैन्य हमले किए थे। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करना बताया गया था।
ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई 119 डॉलर पार
सोमवार को इससे पहले तेल की कीमतें कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं। उस दिन ब्रेंट क्रूड की कीमत 119.50 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत 119.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था।
इस बीच भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में कहा कि फिलहाल वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का भारत की महंगाई दर पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि देश में मुद्रास्फीति इस समय अपने निम्न स्तर के करीब बनी हुई है।
लोकसभा में एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में 28 फरवरी 2026 को भू-राजनीतिक तनाव शुरू होने से पहले तक भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की कीमतें पिछले एक साल से लगातार गिर रही थीं।







