Delhi Cancer Crisis: कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं। हमारे शरीर में कोशिकाएं बनती और नष्ट होती रहती हैं, लेकिन जब ये कोशिकाएं नियंत्रण से बाहर बढ़ने लगती हैं और गांठ बना लेती हैं, तो इसे कैंसर कहा जाता है। यह बीमारी अब किसी एक उम्र तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी इससे प्रभावित हो सकते हैं।
हाल ही में आए आंकड़े दिल्ली के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं। एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल शोध के अनुसार, राजधानी में कैंसर के मामले देश के अन्य बड़े शहरों की तुलना में तेजी से बढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि पुरुषों में कैंसर की संख्या के मामले में दिल्ली अब सभी महानगरों में सबसे आगे है।

अध्ययन में क्या सामने आया?
20 अगस्त 2025 को जारी हुई इस रिपोर्ट में भारत में साल 2015 से 2019 तक कैंसर के मामलों और कैंसर से हुई मौतों का अध्ययन किया गया। इसके लिए देश की 43 कैंसर रजिस्ट्रियों से आंकड़े लिए गए, जो भारत की करीब 18 प्रतिशत आबादी को कवर करते हैं। ये आंकड़े राष्ट्रीय कैंसर रोग सूचना केंद्र, टाटा मेमोरियल सेंटर और तमिलनाडु कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम जैसी संस्थाओं ने इकट्ठा किए थे।
रिपोर्ट बताती है कि इस दौरान देश में लगभग 7.8 लाख नए कैंसर मरीज सामने आए और करीब 2.6 लाख लोगों की जान इस बीमारी के कारण गई। औसतन देखा जाए तो भारत में हर दस में से एक व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी कैंसर होने का खतरा रहता है। कुछ राज्यों में यह खतरा और भी ज्यादा है। जैसे मिजोरम में पुरुषों के लिए कैंसर का जोखिम 21 प्रतिशत से अधिक पाया गया।

Delhi Cancer Crisis: दिल्ली में हालात सबसे गंभीर क्यों हैं?
जब बड़े शहरों की तुलना की गई, तो दिल्ली में कैंसर के मामले सबसे ज्यादा पाए गए। आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में हर एक लाख पुरुषों में करीब 147 लोग कैंसर से पीड़ित हैं, जो अन्य महानगरों के मुकाबले काफी अधिक है।
दिल्ली सीके बिड़ला अस्पताल में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. मनदीप सिंह मल्होत्रा का कहना है कि यह बढ़ोतरी सिर्फ बेहतर जांच या रिकॉर्ड रखने की वजह से नहीं है। उनके मुताबिक, दिल्ली में सच में कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं, जो एक बहुत गंभीर और चिंता की बात है।

कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी के कारण
पर्यावरण-हवा का प्रदूषण: दिल्ली की हवा में बहुत छोटे-छोटे जहरीले कण होते हैं, खासकर पीएम 2.5। ये सांस के साथ शरीर में चले जाते हैं, फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ा देते हैं।लंबे समय तक मिट्टी, धूल और जहरीली धातुओं के संपर्क में रहने से भी कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता है।
तंबाकू और धूम्रपान: सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और तंबाकू के दूसरे उत्पाद मुंह और फेफड़ों के कैंसर की सबसे बड़ी वजह माने जाते हैं।
खराब जीवनशैली: कम चलना-फिरना, मोटापा बढ़ना और ज्यादा जंक फूड खाना शरीर को कमजोर बना देता है, जिससे बीमारियों से लड़ने की ताकत कम हो जाती है।
Delhi Cancer Crisis: दिल्ली के पुरुषों में सबसे आम कैंसर
डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली के पुरुषों में सबसे ज्यादा तीन तरह के कैंसर पाए जा रहे हैं:
फेफड़ों का कैंसर: जो गंदी हवा और धूम्रपान के कारण होता है।
मुंह का कैंसर: जिसकी सबसे बड़ी वजह तंबाकू और गुटखा है।
प्रोस्टेट कैंसर: जो उम्र बढ़ने और गलत जीवनशैली से जुड़ा होता है।
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