Delhi News: अब तक दिल्ली में महिलाओं के मुफ्त में यात्रा करने की छूट थी। किसी भी प्रदेश की हो, तो वह भी बगैर आधार कार्ड दिखाये बस की यात्रा कर सकती थी, सिर्फ उसे कंडक्टर से पास लेना होता था। अब यह सुविधा जनवरी से नहीं मिलेगी। पिछली केजरीवाल सरकार में किसी भी प्रदेश की महिला होती थी, उन्हें कोई नहीं पूछता था कि तुम दिल्ली की हो, या दूसरे प्रदेश की हो, वह आराम से दिल्ली के किसी भी कोने तक बिना टिकट के यात्रा कर सकती थी।
नई भाजपा सरकर ने वह वायदा तोड़ दिया, और उसकी जगह, उन बाहर से आई महिलाओं को बस का किराया देने के लिए मजबूर कर दिया। बाहर से आई महिलाएं अक्सर दिल्ली के घरों में काम करती थीं। वह अपने काम यानी मजदूरी करने के लिए दिल्ली के दूर की जगहों से काम पर आती थीं। महीनेभर वह आराम से अपने काम पर जा सकती थीं। लेकिन इससे उनकी कठिनाइयों को बढ़ा दिया है। उन महिलाओं के बच्चे, जो स्कूल जाते थे, उनको भी किराया न देने से राहत मिलती थी। लेकिन अब वे भी आर्थिक परेशानी का सामना करेंगी। बच्चों को स्कूल भेजना उनके लिए दूभर हो जाएगा।
दिल्ली में जब चुनाव हुए थे, तब भारतीय जनता पार्टी ने ऐसा कोई वायदा नहीं किया था कि हम आधार कार्ड के आधार पर ही बसों में महिलाओं को मुफ्त सेवा देंगे। सरकार का कहना है कि काउंटर जिलाधीश के कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, बस डिपो और आम सेवा केंद्रों पर बनाये जाएंगे। गुलाबी सहेली कार्ड लड़कियों और 12 वर्ष से उूपर की महिलाओं को बितरित किए जाएंगे। शर्त यह है कि उसे दिल्ली का नागरिक होना जरूरी है। एक बार जब यह कार्ड बन जाएंगे, तब बार-बार बनाने की जरूरत नहीं होगी, उसी कार्ड को कंडक्टर की इटीएम मशीन पर टैप किया जाएगा। यह डिजिटल प्रणाली है, इससे पहले वाला गुलाबी कागजी टिकट समाप्त हो जाएगा।
अभी तक दिल्ली में हर महीने 2 करोड़ महिलाएं बसों में यात्रा करती हैं। मार्च से अगस्त के बीचा 12 करोड़ महिलाओं ने बस का फायदा उठाया। 2023 के वर्ष में 13.3 करोड़ महिलाओं ने यात्रा की। सरकार ने इस वर्ष की योजना के लिए 300 करोड़ रुपये रखे थे। अब देखना यही है कि यह कल्याणकारी योजना कितनी सार्थक होती है।






