Delhi News: दिल्ली दंगा मामले में आरोपी और जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद ने कड़कड़डूमा कोर्ट में अंतरिम जमानत की याचिका दायर की है। उन्होंने 14 से 29 दिसंबर तक की राहत मांगी है ताकि वह 27 दिसंबर को होने वाली अपनी बहन के निकाह में शामिल हो सकें। अदालत ने इस याचिका पर 11 दिसंबर को सुनवाई तय की है।
परिवारिक समारोह में शामिल होने की दलील
याचिका में कहा गया है कि उमर खालिद की बहन का निकाह परिवार का बेहद महत्वपूर्ण समारोह है, जिसमें उनकी उपस्थिति आवश्यक है। लंबे समय से जेल में बंद खालिद ने अदालत से यह मानवीय आधार पर जमानत देने का आग्रह किया है। पिछली कई जमानत याचिकाएं अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है, ऐसे में इस अर्जी पर विशेष निगाहें टिकी हैं।
Delhi News: 2020 की हिंसा और गंभीर आरोप
सितंबर 2020 में दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने फरवरी 2020 में दिल्ली में हुई हिंसा की साजिश रची थी। इस मामले में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया गया है। खालिद के साथ शरजील इमाम सहित कई लोगों पर दंगे की साजिश में शामिल होने के गंभीर आरोप हैं। दिल्ली दंगों में कई लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। हिंसा सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शनों के बीच भड़की थी और राजधानी के कई हिस्सों में स्थिति बेकाबू हो गई थी।
क्या है सरकार की दलील?
पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हो रहे हैं, ने अदालत में कहा था कि 2020 की हिंसा अचानक हुई सांप्रदायिक झड़प नहीं थी, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता पर हमला करने के लिए रचा गया षड्यंत्र थी। मेहता ने दावा किया था कि जुटाए गए सबूत- जैसे भाषण, व्हाट्सएप चैट और योजनाबद्ध गतिविधियां- यह बताते हैं कि समाज में सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने की कोशिश की गई। उन्होंने शरजील इमाम के कथित भाषण का उल्लेख करते हुए कहा था कि इमाम हर शहर में चक्का जाम की बात करते हैं जहां मुसलमान रहते हैं।







