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लाल किला आतंकी हमला: दोषी अशफाक को सुप्रीम कोर्ट से फिर राहत की उम्मीद, क्यूरेटिव याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस

Delhi Police: साल 2000 के बहुचर्चित लाल किला आतंकी हमले से जुड़े मामले में दोषी मोहम्मद आरिफ उर्फ अशफाक को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का मौका मिला है। शीर्ष अदालत ने उसकी क्यूरेटिव याचिका पर विचार करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। इस कदम के साथ ही एक बार फिर इस मामले में कानूनी हलचल तेज हो गई है।

 पहले खारिज हो चुकी हैं याचिकाएं

अशफाक की ओर से इससे पहले दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका और क्यूरेटिव याचिका दोनों ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी थीं। इसके बावजूद, सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले के मद्देनज़र उसे दोबारा अपनी बात रखने का अवसर मिला है। इसी आधार पर अब अदालत ने दिल्ली पुलिस से जवाब तलब किया है।

Delhi Police: कौन है अशफाक?

मोहम्मद आरिफ उर्फ अशफाक लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी और पाकिस्तानी नागरिक है। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2011 में उसे लाल किला आतंकी हमले के मामले में फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद उसने इस सजा के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की, जिसे खारिज कर दिया गया। साथ ही राष्ट्रपति के समक्ष दायर दया याचिका से भी उसे कोई राहत नहीं मिली थी।

लाल किला हमला: क्या हुआ था?

22 दिसंबर 2000 को लश्कर-ए-तैयबा के छह आतंकियों ने दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस आतंकी हमले में कुल तीन लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में एक संतरी और राजपूताना राइफल्स के दो जवान शामिल थे। राइफलमैन उमा शंकर मौके पर ही शहीद हो गए थे, जबकि नायक अशोक कुमार ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इसके अलावा इस हमले में नागरिक अब्दुल्ला ठाकुर की भी जान चली गई थी।

Delhi Police: गिरफ्तारी और जांच

26 दिसंबर 2000 को दिल्ली पुलिस ने अशफाक और उसकी पत्नी रहमाना यूसुफ को जामिया नगर इलाके से गिरफ्तार किया था। साल 2001 में इस मामले में चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें अशफाक समेत कुल 21 लोगों को आरोपी बनाया गया। इनमें से आठ आरोपी फरार घोषित किए गए, जबकि तीन आतंकवादी मुठभेड़ में मारे जा चुके थे।

कोर्ट का फैसला

लंबी सुनवाई के बाद वर्ष 2005 में ट्रायल कोर्ट ने अशफाक समेत सात आरोपियों को दोषी करार दिया। अशफाक को फांसी की सजा सुनाई गई, जबकि उसकी पत्नी रहमाना यूसुफ को सात साल की कैद दी गई। नाजिर अहमद कासिद और फारूक अहमद कासिद को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, वहीं बाबर मोहसिन, सदाकत अली और मतलूब आलम को सात साल की जेल की सजा दी गई थी।

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