Delhi Pollution: राजधानी दिल्ली में ही नहीं अन्य महानगरों में भी सांस की बीमारी से बहुत से लोग पीड़ित हो रहे हैं। दिल्ली में ही 2 लाख पीड़ित है, यह आंकड़े सिर्फ वर्ष 2022 और 24 के बीच के हैं। दिल्ली के कई बड़े हिस्सों में वायु प्रदूषण देखें- यह इस तरह से है सबसे अधिक AQI चांदनी चौक में है, यह 465 के करीब है, और कम से कम 268 AQI द्वारका में है, बवाना 436, वजीरपुर 428, विवेक विहार 436, रोहिणी 415, मुनिरका 418, आरके आश्रम 417, ओखला 433, नेहरू नगर 444, आनंद विहार 418, यह स्थिति दिल्ली में थी।
Delhi Pollution: विषैली गैस पी रहे बच्चे
डॉक्टर कह रहे हैं कि नन्हे बच्चों के फेफड़े इतने भारी विषैली गैस को पी रहे हैं। हाल ही में एक पांच वर्ष के बच्चों को टॉन्सिल होने पर ऑपरेशन करवाना पड़ा। यह सब जहरीली गैस को लेने से हुआ, ऐसा ही एक तीन वर्ष के बच्चे के फेफड़े नोएडा में उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे। वायु प्रदूषण की यह दशा अभी तक जैसे की तैसी लोगों को बीमार कर रही है, इस पर अभी तक गंभीरता से सरकार काम नहीं कर पा रही है।
Delhi Pollution: सरकार को हर क्षेत्र में काम करने की जरूरत
दिल्ली हाईकोर्ट भी गंभीर वायु प्रदूषण पर समीक्षा कर रहा है। कल ही कोर्ट में याचिका दायर हुई है, जिसमें दिल्ली के वायु की गुणवत्ता पर ध्यान आकर्षित किया गया है। इस पर आज कोर्ट में विचार हो रहा है। इस सब पर एक ही बात सामने आती है कि जिस दर से वातावरण विभिन्न गैसों से प्रदूषित हो रहा है, उसके लिए सरकार को निराकरण के लिए हर क्षेत्र में काम करने की जरूरत है। अभी तक वाहनों को ही दोषी माना गया है लेकिन वह ही प्रदूषण फैलाने की जड़ नहीं है, और भी कारण है जिनको पहचानना है और अस्पतालों को भी आपातकाल की स्थिति से निपटने के लिए तैयारी करनी चाहिए, स्वच्छता के लक्षण दिखने चाहिए।
लेखक – भगवती प्रसाद डोभाल
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