Digvijay Singh: कांग्रेस पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रिश्तों के बदलते दौर के साथ टकराव और वैचारिक विरोध के रूप में देखा जाता रहा है, जो भारतीय राजनीति का अहम हिस्सा रहा है, लेकिन पार्टी के भीतर समय-समय पर ऐसे स्वर भी उभरते रहे हैं, जिन्होंने संघ की सरहाना की है। हाल ही में दिग्विजय सिंह के बयान के बाद एक बार फिर यह मुद्दा सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। हालांकि, राजनीतिक इतिहास पर नज़र डालें तो यह साफ होता है कि RSS की तारीफ करने वाले दिग्विजय सिंह ही अकेले कांग्रेस नेता नहीं हैं बल्की इस सूची में कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं के नाम शुमार है।
अगर इतिहास पर नजर डाले तो कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने अलग-अलग मौकों पर RSS के सामाजिक कार्यों, संगठनात्मक अनुशासन और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यो को स्वीकार करते हुए संघ के प्रियासों की तारीफ की है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने संघ के जमीनी नेटवर्क और अनुशासन पर टिप्पणी की थी, जबकि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का RSS मुख्यालय जाना और वहां दिया गया भाषण भी लंबे समय तक चर्चा में रहा। जिसके बाद भी कांग्रेस में मतभेद जैसी स्थिति हो गई थी।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस में RSS को लेकर हमेशा एक समान दृष्टिकोण नहीं रहा है। पार्टी के कुछ नेता संघ को पूरी तरह वैचारिक विरोधी मानते रहे हैं, तो वहीं कुछ नेताओं ने इसे एक सामाजिक संगठन के रूप में देखने की बात कही है। यही वजह है कि जब-जब किसी नेता की ओर से RSS के पक्ष में या संतुलित बयान आता है, पार्टी के भीतर और बाहर बहस तेज हो जाती है। इसी के साथ स्पष्ट होता है कि कांग्रेस एक व्यापक विचारधारा वाली पार्टी रही है, जहां अलग-अलग मुद्दों पर मतभेद स्वाभाविक रहे हैं। RSS को लेकर भी पार्टी के भीतर एकमत राय कभी नहीं रही। जहां कुछ नेता संघ की विचारधारा पर कड़ा प्रहार करते रहे हैं, वहीं कुछ ने उसके सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों को अलग दृष्टि से देखा है।
दिग्विजय सिंह के हालिया बयान को भी इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। समर्थकों का कहना है कि लोकतंत्र में संवाद और अलग राय जरूरी है, जबकि आलोचकों के मुताबिक ऐसे बयान पार्टी की पारंपरिक लाइन से अलग नजर आते हैं। इसके बावजूद यह स्पष्ट है कि RSS को लेकर कांग्रेस के भीतर उठती रही आवाजें नई नहीं हैं। कुल मिलाकर, कांग्रेस और RSS के संबंध सिर्फ विरोध तक सीमित नहीं रहे हैं। समय-समय पर संघ के कुछ पहलुओं की सराहना करने वाले बयान यह दर्शाते हैं कि भारतीय राजनीति में विपक्ष पार्टी में होते हुए अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं। राजनीति सिर्फ विरोध तक सीमित नहीं रही है। इतिहास गवाह है कि पार्टी के भीतर समय-समय पर संघ के लिए आवाज उठती रही है और संघ की तारीफ करने वालों की सूची में दिग्विजय सिंह अकेले नाम नहीं हैं।
लेखक: रक्षा रावल
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