Donald trump: अमेरिका के करीब 40 राज्यों में हिमयुग जैसी भीषण ठंड की आहट ने हड़कंप मचा दिया है। रिकॉर्ड तोड़ कोल्ड वेव की चेतावनी के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप का एक सोशल मीडिया पोस्ट सुर्खियों में आ गया है। ट्रंप ने अपने प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस ठंड को लेकर टिप्पणी की, जिसे बाद में व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी शेयर किया।
ट्रंप ने ग्लोबल वार्मिंग पर कसा तंज
राष्ट्रपति ट्रंप ने पोस्ट में लिखा, “40 राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ ठंड पड़ने वाली है। ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया। क्या पर्यावरणवादी विद्रोही बता सकते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग कहां चली गई?” इस बयान के साथ ट्रंप ने अपनी एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें वह काले रंग का भारी विंटर कोट पहने नजर आ रहे हैं। ट्रंप का यह बयान अमेरिका में पहले से जारी डर और चिंता को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
माइनस 40 डिग्री तक गिर सकता है पारा
मौसम विभाग के मुताबिक अमेरिका के बड़े हिस्से में तापमान माइनस 40 डिग्री तक गिरने की आशंका है। देश के आधे से ज्यादा हिस्से में आर्कटिक जैसी ठंड और भीषण विंटर स्टॉर्म को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बर्फीली ठंड हालात को और खतरनाक बना रही है।
Donald trump: 23 करोड़ तक लोग हो सकते हैं प्रभावित
अमेरिकी मौसम एजेंसियों का कहना है कि इस कोल्ड वेव से करीब 170 से 230 मिलियन लोग प्रभावित हो सकते हैं। 12 से अधिक राज्यों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है। विंड चिल के साथ कई इलाकों में तापमान माइनस 30 से माइनस 40 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच सकता है। इससे फ्रॉस्टबाइट, बिजली आपूर्ति ठप होने, सड़कें बंद होने और जानलेवा हालात बनने की आशंका है। टेक्सास और अर्कांसस जैसे दक्षिणी राज्यों से लेकर पूर्वी तट तक भारी बर्फबारी और बर्फीली बारिश जारी है।
Donald trump: जलवायु परिवर्तन पर फिर छिड़ी बहस
ट्रंप ने इस भीषण ठंड को जलवायु परिवर्तन के खिलाफ तंज के तौर पर पेश किया है। उन्होंने पर्यावरण कार्यकर्ताओं को “एनवायरनमेंटल इंसरेक्शनिस्ट्स” कहकर एक बार फिर ग्लोबल वार्मिंग के सिद्धांत पर सवाल खड़े किए हैं। यह उनका पुराना रुख रहा है, जिसमें वे अत्यधिक ठंड को जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सबूत के तौर पर पेश करते रहे हैं।
क्या कहते हैं जलवायु वैज्ञानिक
Donald trump: जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि ट्रंप की यह सोच भ्रामक है। विशेषज्ञों के मुताबिक जलवायु परिवर्तन से औसत तापमान जरूर बढ़ता है, लेकिन इससे मौसम की चरम घटनाएं भी ज्यादा होती हैं। पोलर वोर्टेक्स के कमजोर होने से अत्यधिक ठंडी हवाएं दक्षिण की ओर खिसक रही हैं, जिससे असामान्य ठंड पड़ रही है। वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि गर्मी की लहर, बाढ़, सूखा और कभी-कभी रिकॉर्ड ठंड ये सभी जलवायु संकट का हिस्सा हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका को अब व्यंग्य नहीं, बल्कि मजबूत तैयारी, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और ठोस नीतियों की जरूरत है।
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