अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने क्यूबा को लेकर ऐसा बयान दिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि वह किसी न किसी तरीके से क्यूबा को अपने नियंत्रण में लेने का इरादा रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे क्यूबा को “आजाद” करना पड़े या किसी और तरीके से नियंत्रण में लेना पड़े, अमेरिका उसके साथ अपनी मर्जी से कदम उठा सकता है। ट्रम्प की इस टिप्पणी को कूटनीतिक हलकों में बेहद असामान्य और आक्रामक माना जा रहा है।
अमेरिका और क्यूबा के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं, लेकिन किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने सार्वजनिक रूप से इस तरह क्यूबा पर कब्जा करने जैसी बात नहीं कही थी। ऐसे में ट्रम्प की टिप्पणी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
Donald Trump का चौंकाने वाला बयान
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में इस तरह का बयान सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी नहीं बल्कि संभावित रणनीतिक संकेत भी हो सकता है। इस साल ट्रम्प प्रशासन पहले ही वेनेजुएला और ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर चुका है। ऐसे में क्यूबा को लेकर दिया गया बयान अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरों में एक संभावित अगले कदम के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका क्यूबा पर दबाव बढ़ाता है तो इससे पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है।
तेल सप्लाई रोककर बढ़ाया दबाव
अमेरिका ने क्यूबा पर दबाव बनाने के लिए पहले ही कई आर्थिक कदम उठाए हैं। जनवरी से क्यूबा को मिलने वाली तेल आपूर्ति लगभग बंद कर दी गई है। अन्य देशों को भी चेतावनी दी जा रही है कि वे क्यूबा को तेल न भेजें। हाल ही में अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने कोलंबिया से क्यूबा जा रहे एक तेल टैंकर को रोक दिया था, जिससे वहां ऊर्जा संकट और गहरा गया। तेल की कमी का असर क्यूबा में साफ दिखाई दे रहा है। पेट्रोल की कीमत ब्लैक मार्केट में करीब 35 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है। देश के कई हिस्सों में रोजाना बिजली कटौती हो रही है और अस्पतालों में जरूरी सर्जरी तक टालनी पड़ रही हैं। दवाइयों और खाने की कमी भी लोगों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है।
बातचीत की कोशिश में क्यूबा सरकार
इन हालात के बीच क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल ने हाल ही में देश को संबोधित करते हुए संकेत दिया कि अमेरिका के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे खोलने और सुधार की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। खबरें यह भी हैं कि अमेरिका चाहता है कि क्यूबा की मौजूदा सत्ता में बदलाव हो, हालांकि अभी तक इस पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। क्यूबा की स्थिति को देखते हुए रूस ने भी प्रतिक्रिया दी है। रूस के अधिकारियों ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर वह क्यूबा की मदद के लिए आगे आ सकता है। दोनों देशों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। यह संकेत बताता है कि अगर तनाव बढ़ता है तो यह मुद्दा वैश्विक शक्ति संतुलन का हिस्सा बन सकता है।
निवेश के नजरिए से भी देख रहे हैं ट्रम्प
ट्रम्प लंबे समय से क्यूबा को कारोबारी नजरिए से भी देखते रहे हैं। उनके संगठन के प्रतिनिधि पहले भी क्यूबा में निवेश की संभावनाओं का अध्ययन कर चुके हैं। उन्होंने हालिया बयान में क्यूबा को एक खूबसूरत द्वीप बताते हुए कहा कि वहां निवेश की संभावनाएं मौजूद हैं। हालांकि, उनके बयान से यह भी साफ हुआ कि वह क्यूबा को आर्थिक रूप से कमजोर देश मानते हैं। क्यूबा और अमेरिका के रिश्तों का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1959 में फिदेल कास्त्रो की क्रांति के बाद क्यूबा ने कम्युनिस्ट नीतियां अपनाईं और अमेरिकी कंपनियों की संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। इसके जवाब में अमेरिका ने क्यूबा पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए, जो दशकों तक जारी रहे।
कास्त्रो के खिलाफ कई साजिशें
फिदेल कास्त्रो को अमेरिका अपने प्रमुख विरोधियों में गिनता था। कई रिपोर्टों में दावा किया गया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने उन्हें खत्म करने के लिए कई योजनाएं बनाईं। जहरीले सिगार से लेकर जहरीले पेन तक अलग-अलग तरीकों की कोशिशें की गईं, लेकिन कोई भी योजना सफल नहीं हो सकी। 2016 में कास्त्रो के निधन के साथ क्यूबा की राजनीति का एक बड़ा अध्याय खत्म हो गया, लेकिन अमेरिका के साथ तनाव अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।
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