Energy Changes: नई दिल्ली में मंगलवार को ‘इंडिया एनर्जी वीक 2026’ का भव्य आगाज हुआ, जहां ऊर्जा क्षेत्र में निवेश, साझेदारी और व्यावहारिक बदलाव को जमीन पर उतारने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत, निवेशकों और वैश्विक प्रतिनिधियों ने भाग लेकर भारत को उभरते वैश्विक ऊर्जा केंद्र के रूप में रेखांकित किया।
संतुलित निवेश से ही संभव ऊर्जा बदलाव
उद्घाटन सत्र में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन का अर्थ केवल पारंपरिक स्रोतों को हटाना नहीं, बल्कि नए और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को जोड़ना है। उन्होंने तेल, गैस, बायोफ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन, एलएनजी और स्वच्छ ईंधन क्षेत्रों में निरंतर निवेश को अनिवार्य बताया।
Energy Changes: सुधारों से बढ़ी ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता
पुरी ने बताया कि ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (OALP) और डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड्स (DSF) जैसी योजनाओं से भारत वैश्विक निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। साथ ही एलपीजी कवरेज का विस्तार और स्वच्छ ईंधन तक पहुंच भारत की समावेशी ऊर्जा नीति को दर्शाता है।
वैश्विक मंच बनता इंडिया एनर्जी वीक
यूएई के मंत्री सुल्तान अल जाबेर और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी मंच की सराहना करते हुए कहा कि इंडिया एनर्जी वीक अब विचारों को कार्रवाई में बदलने वाला वैश्विक मंच बन चुका है। सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नवाचार और निवेश को ऊर्जा भविष्य की कुंजी बताया गया।
ये भी पढ़ें… बर्फबारी का असर, श्रीनगर एयरपोर्ट से सभी उड़ानें रद्द, सैकड़ों पर्यटक फंसे







