गीता प्रेस: धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में दुनिया को हिंदू संस्कृति का भरपूर प्रचार-प्रसार करने वाली गीता प्रेस ने महत्वपूर्ण काम किया है। बहुत सस्ते दामों में गीता, रामायण, महाभारत, दुर्गासप्तशती आदि ऐसी पुस्तकें हैं, जिसने हिंदू संस्कृति का संरक्षण किया। प्रख्यात वैज्ञानिक आइंस्टीन ने भी गीता की सरहाना की थी। यहूदी और महान वैज्ञानिक होने के बावजूद, वे गीता की प्रशंसा करना नहीं चूके।
अब गीता प्रेस ने फ्रेंचाइजी भी शुरू कर दी है। इस महत्वाकंाक्षी योजना की षुरुआत नेपाल से शुरू कर दी है। गीता प्रेस ने फ्रेंचाइजी योजना के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। ऐसा करने से संस्था की पहचान, गुणवत्ता और मूल्यों से कोई समझौता न हो सके। फ्रेंचाइजी लेने वाले व्यक्ति के पास अपनी स्वयं की दुकान होनी अनिवार्य है। उस दुकान में केवल गीताप्रेस द्वारा प्रकाशित पुस्तकें ही रखी होनी चाहिए। किसी अन्य प्रकाशक और विक्रेता की पुस्तकें
वहां नहीं होन चाहिए। बेची भी नहीं जानी चाहिए। दुकान के बाहर गीता प्रेस का अधिकृत बोर्ड लगा होना चाहिए। इस योजना के अंर्तगत ग्रीता प्रेस अपने भागीदारों को सामान्य बुकसेलरों की तुलना में छह प्रतिशत अधिक छूट देगा। यह भी उनका मानना है कि एक शहर में एक ही शोरूम होगा।
बीच में ऐसा लगने लगा था कि गीताप्रेस अपने प्रकाशन के क्षेत्र में उदासीन हो गई है, पर जिस तरह से गीताप्रेस की पुस्तकों को जनता तक पहुचाने में वे सक्रिय हुए हैं; इससे आशा बंघती है कि गीता प्रेस के इस प्रयास से देश ही नहीं, विश्व के सामने हिंदू संस्कृति को समझने में दूसरे धर्म के व्यक्ति को भी लाभ मिलेगा।
राम और कृष्ण हिुदू धर्म में ऐसे चरित्र हैं, जो आम आदमी को प्रेरणा देते हैं कि मनुष्य रूप में जन्म लेने के बावजूद इन नायकों ने सामाजिक संरचना को विश्वभर में फैलाया। व्यक्ति को अनुशासित रहने की शिक्षा हमारे धर्मग्रंथ देते हैं।
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