Ghaziabad News: दर्द से राहत का भरोसा देकर किया गया घुटनों का ऑपरेशन मरीज के लिए नई मुसीबत बन गया। ऑपरेशन के महीनों बाद भी हालत न सुधरने और पीड़ा बढ़ने की शिकायत पर स्थायी लोक अदालत ने मैक्स अस्पताल के डॉक्टर को चिकित्साकीय लापरवाही का दोषी ठहराते हुए 20 लाख रुपए क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।
अब पढ़े क्या है मामला…
लोनी निवासी वीर सिंह की पत्नी लंबे समय से घुटने की तकलीफ से जूझ रही थीं। परिजनों का कहना है कि कई जगह इलाज कराया गया लेकिन आराम नहीं मिला। इसी बीच महिला को वैशाली स्थित मैक्स अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने सर्जरी को अंतिम और असरदार इलाज बताते हुए ऑपरेशन की सलाह दी। डॉक्टर के दावे पर भरोसा कर परिजनों ने ऑपरेशन कराया, लेकिन सर्जरी के बाद महिला की हालत सुधरने की बजाय और बिगड़ गई। दर्द कम होने के बजाय बढ़ता चला गया और रोजमर्रा की गतिविधियां भी मुश्किल हो गईं।बार-बार अस्पताल जाने के बावजूद न तो संतोषजनक जवाब मिला ना ही राहत।
Ghaziabad News: पीड़िता ने खटखटाया अदालत का दरवाजा
इलाज से निराश होकर पीड़िता ने अस्पताल के प्रबंधन और ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर के खिलाफ स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान पीड़िता ने इलाज से जुड़े दस्तावेज, रिपोर्ट और खर्च का विवरण पेश किया। वहीं, अस्पताल और डॉक्टर की ओर से दी गई दलीलों को भी अदालत ने परखा।
मामले की सुनवाई कर रही स्थायी लोक अदालत की अध्यक्ष रीता सिंह ने स्पष्ट कहा कि ऑपरेशन के बाद मरीज को किसी भी प्रकार का लाभ ना मिलना और लगातार दर्द में रहना लापरवाही को दर्शाता है। अदालत ने माना कि मरीज को शारीरिक ही नहीं मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ी। इसी आधार पर डॉक्टर को चार माह के भीतर 20 लाख रुपए क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया गया। यह फैसला निजी अस्पतालों में इलाज की जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
Report By: विभु मिश्रा
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