Goa Fire Tragedy: गोवा में नाइटक्लब में लगी आग ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी, लेकिन दिल्ली के एक ही परिवार के चार लोगों की मौत ने इस हादसे को और भी भयावह बना दिया। रात की रोशनी का मज़ा लेने निकला यह परिवार कुछ ही मिनटों में धुएँ, लपटों और अफरातफरी की अँधेरी दुनिया में समा गया। यह उनकी पहली गोवा ट्रिप थी और आख़िरी साबित हुई। मरने वालों में तीन बहनें अनीता, कमला और सरोज जोशी और चौथी बहन भावना के पति विनोद कुमार शामिल हैं। विडंबना यह है कि तीनों बहनें अपनी एक फँसी हुई बहन को बचाने के लिए दोबारा जलते क्लब में घुस गईं और फिर कभी वापस नहीं लौटीं।
शवों की पहचान तक मुश्किल
अनीता और कमला के शव मिल गए हैं, जिन्हें पोस्टमॉर्टम तक सुरक्षित रखा गया है। लेकिन बाकी दो शव इतने बुरी तरह जले हैं कि पहचान कर पाना लगभग असंभव हो गया है। आग ने न सिर्फ़ उन्हें छीन लिया, बल्कि उनका चेहरा, उनकी पहचान, सब लील लिया। सबसे बड़ी बहन कमला के दो बच्चे हैं। उनके पति नवीन और विनोद दोनों भाई व्यवसायी हैं। विनोद, जो अपनी पत्नी भावना के साथ केवल छुट्टियाँ बिताने आए थे, उसी आग में अपनी तीन साली बहनों के साथ जलकर मर गए।
करावल नगर में रहने वाले परिवार के पड़ोसी हरीश सिंह बताते हैं कि घर में मौजूद उनकी बूढ़ी मां को अभी तक इस भयानक सच्चाई से दूर रखा गया है। मां की तबीयत खराब है। जबकि परिवार को डर है कि यह खबर उन्हें तोड़ देगी। किसी को भी चाची से मिलने की इजाज़त नहीं है। घर में सन्नाटा है। सिर्फ नवीन सच जानता है।
Goa Fire Tragedy: आग से कुछ मिनट पहले तक हँसी–खुशी
परिवार खाने के लिए क्लब आया था। खाना खत्म भी हो चुका था और वे बाहर निकलने ही वाले थे। तभी आग लगी। एक बहन अंदर रह गई। बाकी तीन लोग उसे बचाने के लिए वापस दौड़े। विनोद भी उनके पीछे भाग गए। लेकिन लपटें इतनी तेज़ थीं कि उनमें से कोई लौट नहीं पाया। भावना किसी तरह बाहर भाग निकलीं लपटों, धुएँ और पीछे से आती चीख़ों के बीच। बाकी सब वहीं खत्म हो गया। वहीं घर के बाहर रिश्तेदारों और पड़ोसियों की भीड़ है, लेकिन अंदर एक भारी ख़ामोशी। दो घरों के बच्चों ने अपने माता-पिता खो दिए।
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