Gold Silver Prices: बढ़ते वैश्विक तनाव के माहौल में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों ने फिर नया रिकॉर्ड बना लिया। घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर कीमती धातुएं अपने पिछले उच्च स्तर को पार कर गईं। फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1,47,996 रुपये प्रति 10 ग्राम के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया, जबकि मार्च डिलीवरी वाली चांदी 3,19,949 रुपये प्रति किलोग्राम तक चढ़ गई।
एमसीएक्स पर ऐतिहासिक ऊंचाई
एक दिन पहले यानी सोमवार को भी बाजार में तेजी देखी गई थी। उस दिन एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 1,45,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ था, वहीं मार्च डिलीवरी की चांदी 3,01,315 रुपये प्रति किलोग्राम के नए शिखर पर पहुंची थी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो कॉमेक्स पर चांदी की कीमत 94.320 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई, जबकि सोना 4,708.10 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया। इससे पहले सोने ने 4,689.39 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर छुआ था।

Gold Silver Prices: सोना-चांदी में तेज बढ़त
इस तेजी के पीछे वैश्विक राजनीतिक तनाव बड़ी वजह माने जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड से जुड़े बयानों और टैरिफ लगाने की चेतावनियों से निवेशकों में चिंता बढ़ी है। इसी कारण लोग सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे सोने और चांदी की मांग तेज हुई है।
खबर लिखे जाने तक एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 2,255 रुपये यानी 1.55 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,47,894 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 7,279 रुपये यानी 2.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 3,17,554 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।
यह उछाल उस समय देखने को मिला जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड मुद्दे का विरोध करने वाले आठ यूरोपीय देशों पर नया टैरिफ लगाने की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने दोहराया कि यूरोप से अमेरिका आने वाले सामान पर टैरिफ लगाया जाएगा।

भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ी
इस पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि वे यूरोपीय संघ के ‘एंटी-कोएरशन’ तंत्र को लागू करने की मांग करेंगे। वहीं जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। इसके अलावा, डेनमार्क द्वारा ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने के फैसले से भू-राजनीतिक अनिश्चितता और गहराई है।
बाजार इस बात पर भी नजर रखे हुए हैं कि कहीं ट्रंप प्रशासन अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के खिलाफ कोई कदम तो नहीं उठाता। इससे फेड की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, जिसका फायदा भी कीमती धातुओं को मिल रहा है।
सुरक्षित निवेश का भरोसा
इसके साथ ही अमेरिका में आगे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें भी सोने और चांदी की कीमतों को सहारा दे रही हैं। साल 2025 में भी ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं ने इन धातुओं को मजबूत समर्थन दिया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा तेजी केवल सुरक्षित निवेश की वजह से नहीं है, बल्कि चांदी की बढ़ती औद्योगिक मांग भी इसका अहम कारण है। सोलर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में चांदी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।

तकनीकी नजरिए से विश्लेषकों का मानना है कि कॉमेक्स पर चांदी का रुझान फिलहाल मजबूत बना हुआ है। 85 से 88 डॉलर प्रति औंस का स्तर आने वाले समय में कीमतों को सहारा दे सकता है।
लंबी अवधि में मजबूती बरकरार
ऑगमोंट की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुनाफावसूली के कारण कीमतों में थोड़ी गिरावट आ सकती है और चांदी 84 डॉलर प्रति औंस या करीब 2,60,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक आ सकती है। हालांकि इसके बाद दोबारा तेजी लौटने की संभावना जताई गई है।
विश्लेषकों ने यह भी चेतावनी दी है कि तेज बढ़त के बाद निवेशक मुनाफा वसूली कर सकते हैं, लेकिन आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं और मजबूत औद्योगिक मांग के चलते लंबे समय में सोने और चांदी का रुझान सकारात्मक बना रह सकता है।
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