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बिहार ने खोया जमीनी राजनीति का एक मजबूत स्तंभ, पटना में ली अंतिम सांस

Goodbye Satish Babu:

Goodbye Satish Babu: बिहार के राजनीतिक क्षितिज का एक चमकता सितारा हमेशा के लिए अस्त हो गया है। पूर्व विधायक और जनप्रिय नेता सतीश कुमार का निधन पटना के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही नालंदा, शेखपुरा और पूरे प्रदेश के राजनीतिक कार्यकर्ताओं में मायूसी छा गई है। सतीश बाबू को न केवल एक मंझे हुए राजनेता के तौर पर याद किया जाएगा, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की लड़ाई लड़ने वाले एक योद्धा के रूप में भी उनका नाम सदैव जीवित रहेगा।

Goodbye Satish Babu: स्वास्थ्य की जटिलताओं से जूझ रहे थे पूर्व विधायक

चिकित्सकीय जानकारी के मुताबिक, सतीश कुमार पिछले कुछ दिनों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे थे। ब्रेन हैमरेज होने के बाद उनकी स्थिति काफी नाजुक हो गई थी, जिसके चलते उन्हें बेहतर उपचार हेतु पटना के फोर्ड हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था। 78 वर्षीय सतीश कुमार ने जीवन के इस आखिरी संघर्ष में सोमवार को अपनी अंतिम सांस ली। वर्ष 1948 में जन्मे सतीश बाबू का संपूर्ण जीवन जनसेवा और राजनीतिक शुचिता को समर्पित रहा।

Goodbye Satish Babu: संघर्षों की भट्टी में तपा राजनीतिक व्यक्तित्व

सतीश कुमार का राजनीतिक उत्थान किसी विरासत का परिणाम नहीं, बल्कि उनके कड़े परिश्रम और संघर्षों की उपज था। उन्होंने अपने शुरुआती दौर में ही कद्दावर नेता राजो सिंह के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरकर अपनी निर्भीकता का परिचय दे दिया था। वर्ष 1990 में उन्होंने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के बैनर तले सूर्यगढ़ा विधानसभा से जीत दर्ज कर सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद 1995 के चुनाव में उन्होंने अस्थावां क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ऐतिहासिक जीत हासिल कर अपनी लोकप्रियता साबित की थी।

क्षेत्रीय विकास और संसदीय सफर की यादें

अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे लेकिन जनता से उनका जुड़ाव कभी कम नहीं हुआ। साल 2001 में उन्होंने समता पार्टी के टिकट पर विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। संसदीय राजनीति की बात करें तो 2009 में उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के उम्मीदवार के रूप में नालंदा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, जहाँ वे मुख्य मुकाबले में दूसरे स्थान पर रहे थे। उनकी कार्यशैली और बेबाकी आज भी उनके समर्थकों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती है।

राजनीतिक जगत में शोक और अंतिम विदाई

उनके देहावसान पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। अस्थावां विधायक डॉ. जितेंद्र कुमार ने उन्हें याद करते हुए कहा कि सतीश बाबू का जाना उनके लिए एक व्यक्तिगत क्षति है क्योंकि वे हमेशा एक अभिभावक की तरह मार्गदर्शन करते थे। स्थानीय लोगों और समर्थकों का कहना है कि सतीश कुमार के रूप में समाज ने एक ऐसा सच्चा हितैषी खो दिया है जो हर सुख-दुख में जनता के साथ मजबूती से खड़ा रहता था।

 

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