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भारत मलेरिया उन्मूलन के बेहद करीब, ICMR की रिपोर्ट से मिले सकारात्मक संकेत

भारत जल्द ही मलेरिया जैसी घातक बीमारी से मुक्ति की ओर बढ़ता दिख रहा है। यह दावा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान (NIMR) की हालिया रिपोर्ट में किया गया है। NIMR की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि शहरों में मलेरिया का स्वरूप बदल रहा है। निर्माण स्थलों पर जमा पानी, खुले कंटेनर और अत्यधिक आबादी वाले क्षेत्रों में एनोफेल्स स्टेफेन्सी मच्छर की मौजूदगी के कारण अर्बन मलेरिया के मामले बढ़ रहे हैं।

Icmr report: भारत जल्द ही मलेरिया जैसी घातक बीमारी से मुक्ति की ओर बढ़ता दिख रहा है। यह दावा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान (NIMR) की हालिया रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2015 से 2024 के बीच देश में मलेरिया के मामलों में करीब 80 से 85 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि साल 2024 में देश के 92 प्रतिशत जिलों में मलेरिया का स्तर एक अंक से नीचे आ गया है, जिसे बीमारी के प्रभावी नियंत्रण का मजबूत संकेत माना जा रहा है।

प्री-एलीमिनेशन चरण में पहुंचा भारत

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब मलेरिया उन्मूलन के प्री-एलीमिनेशन फेज में प्रवेश कर चुका है, यानी बीमारी का बड़े स्तर पर प्रसार काफी हद तक थम गया है। ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल के अनुसार, बीते एक दशक में भारत ने मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा प्रयासों को और मजबूत किया जाए, तो मलेरिया को स्थायी रूप से समाप्त किया जा सकता है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 2030 तक भारत को मलेरिया-मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, और मौजूदा आंकड़े इस दिशा में उम्मीद जगाते हैं।

Icmr report: कुछ क्षेत्रों में अब भी बनी हुई है चुनौती

हालांकि समग्र स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है, लेकिन रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि पूर्वोत्तर राज्यों, घने वन क्षेत्रों, सीमा इलाकों और आदिवासी क्षेत्रों में मलेरिया अब भी एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां, स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच और बिना लक्षण वाले मामलों की पहचान न हो पाना, बीमारी के नियंत्रण में बाधा बन रहे हैं। इसके अलावा, दवाओं की नियमित आपूर्ति, रैपिड डायग्नोस्टिक किट की गुणवत्ता, कीटनाशकों के प्रति मच्छरों का प्रतिरोध और प्रभावी मच्छर नियंत्रण उपायों की कमी भी उन्मूलन की राह में चुनौतियां पैदा कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम चरण में सबसे अधिक सतर्कता की जरूरत होती है, क्योंकि थोड़ी सी चूक से बीमारी दोबारा फैल सकती है।

शहरी इलाकों में बदल रहा मलेरिया का स्वरूप

Icmr report: NIMR की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि शहरों में मलेरिया का स्वरूप बदल रहा है। निर्माण स्थलों पर जमा पानी, खुले कंटेनर और अत्यधिक आबादी वाले क्षेत्रों में एनोफेल्स स्टेफेन्सी मच्छर की मौजूदगी के कारण अर्बन मलेरिया के मामले बढ़ रहे हैं। दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई और हैदराबाद जैसे बड़े शहर इसके प्रमुख उदाहरण हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौजूदा प्रगति की रफ्तार बनी रहती है और शहरों के हॉटस्पॉट, जंगलों और पूर्वोत्तर क्षेत्रों के लिए अलग-अलग स्थानीय रणनीतियां अपनाई जाती हैं, तो भारत 2030 तक मलेरिया-मुक्त देशों की सूची में शामिल हो सकता है। इसके लिए हर जिले की जरूरत के अनुसार माइक्रो-प्लान तैयार करना बेहद जरूरी होगा।

 

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