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जंग बढ़ी तो भारत में LPG संकट का खतरा: सरकार ने रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का आदेश

India LPG Crisis Risk:

India LPG Crisis Risk: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। संभावित गैस संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी (LPG) उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण गैस सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने निर्देश दिया है कि रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल प्राथमिकता से रसोई गैस बनाने के लिए करें।

 सिलेंडर की किल्लत रोकने के लिए कदम

सरकार के आदेश के अनुसार सभी कंपनियों को प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई सरकारी तेल कंपनियों को देनी होगी। इनमें

  • इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC)

  • हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)

  • भारत पेट्रोलियम (BPCL)

शामिल हैं। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं तक बिना रुकावट गैस सिलेंडर की सप्लाई बनाए रखना है।

भारत में गैस संकट की दो बड़ी वजह

⚠ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरा

  • 167 किमी लंबा समुद्री मार्ग जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है
  • दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20% इसी रास्ते से गुजरता है
  • भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी मार्ग से आयात करता है
  • ईरान युद्ध के कारण तेल टैंकर इस रूट से गुजरने से बच रहे हैं

🔥 कतर के LNG प्लांट का प्रोडक्शन रुका

  • ईरान के ड्रोन हमलों के बाद कतर के LNG प्लांट का उत्पादन रुका
  • कतर भारत को गैस सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है
  • भारत अपनी जरूरत की लगभग 40% LNG कतर से आयात करता है
  • हर साल लगभग 2.7 करोड़ टन LNG कतर से आती है

 

India LPG Crisis Risk: CNG कंपनियों ने सरकार को दी चेतावनी

गैस संकट की आशंका को देखते हुए एसोसिएशन ऑफ सीजीडी एंटिटीज (ACE) ने सरकारी कंपनी GAIL को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। कंपनियों का कहना है कि अगर कतर से सस्ती गैस नहीं मिली तो उन्हें स्पॉट मार्केट से महंगी गैस खरीदनी पड़ेगी, जहां कीमत फिलहाल 25 डॉलर प्रति यूनिट तक पहुंच गई है, जो कॉन्ट्रैक्ट गैस से दोगुनी है। कंपनियों को यह भी डर है कि अगर CNG महंगी हुई तो लोग इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।

India LPG Crisis Risk: प्राइवेट कंपनियों पर भी असर

सरकार के फैसले से प्राइवेट सेक्टर, खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) जैसी कंपनियों पर असर पड़ सकता है। प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल के बजाय LPG बनाने में लगाने से पॉलीप्रोपाइलीन और अल्काइलेट्स जैसे उत्पादों के उत्पादन और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं

सरकार का कहना है कि स्थिति चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है।

  • रूस से आयात: भारत अब अपनी जरूरत का लगभग 20% कच्चा तेल रूस से मंगा रहा है।

  • पर्याप्त भंडार: देश में पेट्रोलियम और LPG का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

क्या है एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955

सरकार ने यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) 1955 के तहत जारी किया है। इस कानून के तहत सरकार जरूरत पड़ने पर आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन और सप्लाई को नियंत्रित कर सकती है, ताकि देश में किसी भी प्रकार की कमी न हो। मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बीच भारत ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

यह भी पढे़ : इजराइल-ईरान जंग का सातवां दिन: ईरान ने मिसाइलों की 22वीं खेप दागी, कुवैत में अमेरिकी बेस पर ड्रोन हमला

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