India-New Zealand Agreement: भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर ऐतिहासिक मुहर लग गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लस्कन ने टेलीफोन वार्ता के दौरान इस महत्वपूर्ण समझौते की घोषणा की। दोनों देशों के बीच इस एफटीए से 20 मिलियन डॉलर के निवेश की उम्मीद है। यह भारत के लिए ओमान, ब्रिटेन, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और मॉरीशस के बाद सातवां एफटीए है।
व्यापार और निवेश में होगा बढ़ावा
प्रधानमंत्रियों ने इस समझौते को दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, नवाचार और साझेदारी के लिए उत्प्रेरक बताया। उन्होंने अगले पांच वर्षों में आपसी व्यापार को दोगुना करने और अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड से भारत में 20 बिलियन डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा। पीएमओ के अनुसार, एफटीए से बाजार तक पहुंच बढ़ेगी, निवेश का प्रवाह मजबूत होगा और नवाचार, एमएसएमई, छात्रों और युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे।
India-New Zealand Agreement: उत्पादों पर टैरिफ में भारी कटौती
इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड के 95 फीसदी निर्यात पर टैरिफ को पूरी तरह समाप्त या काफी कम किया जाएगा। लगभग 57 प्रतिशत उत्पादों को पहले दिन ही ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी, जो समझौते के पूरी तरह लागू होने पर 82 फीसदी तक पहुंच जाएगी। शेष 13 फीसदी उत्पादों पर भी टैरिफ में भारी कटौती की जाएगी। यह किसी भी भारतीय एफटीए में अब तक की सबसे बड़ी टैरिफ रियायत मानी जा रही है।
रणनीतिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे
दोनों नेताओं ने रक्षा, खेल, शिक्षा और लोगों के बीच संबंध जैसे द्विपक्षीय सहयोग के क्षेत्रों में हुई प्रगति का स्वागत किया। उनका मानना है कि एफटीए से दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग मजबूत होगा और आर्थिक जुड़ाव को नई ऊंचाई मिलेगी।
निर्यातकों और भारतीय मिडिल क्लास के लिए अवसर
न्यूजीलैंड के बयान के अनुसार, समझौता उनके निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थिति में लाएगा और भारतीय मिडिल क्लास के लिए नए अवसर खोल देगा। इससे 10 साल में निर्यात की वैल्यू दोगुना करने की दिशा में तेजी आएगी।
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