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जब भारत में भी हैं तेल के कुएं तो फिर विदेशों से क्यों मंगाना पड़ता है कच्चा तेल? जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह

जब भारत में भी हैं तेल के कुएं तो फिर विदेशों से क्यों मंगाना पड़ता है कच्चा तेल? जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह

India oil Import: भारत के कई हिस्सों में कच्चे तेल के भंडार मौजूद हैं। असम के डिगबोई से लेकर गुजरात के तटीय इलाकों और मुंबई हाई के समुद्री क्षेत्र तक देश में कई तेल कुएं हैं। इसके बावजूद भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब देश में तेल निकलता है तो फिर अरब देशों या रूस से कच्चा तेल क्यों खरीदा जाता है।असल में इसके पीछे कई आर्थिक, तकनीकी और उत्पादन से जुड़े कारण हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि भारत को विदेशों से तेल मंगाने की जरूरत क्यों पड़ती है।

घरेलू उत्पादन और मांग में बड़ा अंतर

भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में से एक है। बढ़ती आबादी, उद्योगों का विस्तार और वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण देश में पेट्रोल और डीजल की मांग लगातार बढ़ रही है।हालांकि भारत में तेल का उत्पादन होता है, लेकिन यह कुल जरूरत का केवल लगभग 15 से 20 प्रतिशत ही पूरा कर पाता है। बाकी की जरूरत पूरी करने के लिए देश को लगभग 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करना पड़ता है।

India oil Import: नए तेल भंडार खोजने की चुनौती

देश में तेल की खोज लगातार जारी है और ओएनजीसी तथा ऑयल इंडिया जैसी कंपनियां नए भंडार खोजने में लगी हुई हैं। लेकिन तेल की खोज एक महंगी और अनिश्चित प्रक्रिया होती है।भारत में मौजूद कई पुराने तेल क्षेत्र अब परिपक्व हो चुके हैं। उदाहरण के तौर पर मुंबई हाई जैसे क्षेत्रों में उत्पादन धीरे-धीरे कम हो रहा है और वहां से तेल निकालना पहले की तुलना में ज्यादा महंगा पड़ता है। इसके मुकाबले मध्य पूर्व के देशों में तेल निकालना अपेक्षाकृत आसान और सस्ता होता है।

India oil Import: तेल की गुणवत्ता भी होती है अहम

हर जगह मिलने वाला कच्चा तेल एक जैसा नहीं होता। कुछ तेल कम सल्फर वाले होते हैं जिन्हें “स्वीट क्रूड” कहा जाता है, जबकि कुछ में सल्फर की मात्रा अधिक होती है।
भारत की आधुनिक रिफाइनरियां अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ईंधन तैयार करती हैं। इसके लिए उन्हें अलग-अलग गुणवत्ता के कच्चे तेल का मिश्रण चाहिए होता है। कई बार घरेलू तेल उस गुणवत्ता का नहीं होता जो उच्च स्तर का ईंधन बनाने के लिए जरूरी होता है, इसलिए विदेशों से भी अलग-अलग ग्रेड का तेल मंगाया जाता है।

आर्थिक फायदे का भी होता है गणित

कई बार विदेशों से तेल खरीदना आर्थिक रूप से भी लाभकारी साबित होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के दौरान भारत को कई देशों से रियायती दरों पर तेल मिल जाता है।उदाहरण के तौर पर रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने रूस से काफी कम कीमत पर कच्चा तेल खरीदा। ऐसे सौदे देश के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद होते हैं और ऊर्जा आपूर्ति भी स्थिर बनी रहती है।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक भंडार

भारत सरकार यह समझती है कि केवल आयात पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसी कारण देश में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाए जा रहे हैं।विशाखापत्तनम, मंगलुरु और अन्य स्थानों पर जमीन के नीचे बड़े टैंकों में कच्चा तेल जमा किया जाता है। आपात स्थिति में यह भंडार देश की ऊर्जा जरूरतों को कुछ समय तक पूरा करने में मदद करता है।

भविष्य में आयात कम करने की कोशिश

सरकार कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के लिए कई कदम उठा रही है। इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर काम किया जा रहा है।
हालांकि फिलहाल भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए विदेशी तेल आयात करना जरूरी बना हुआ है। जब तक घरेलू उत्पादन और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत पर्याप्त नहीं हो जाते, तब तक देश को वैश्विक तेल बाजार पर निर्भर रहना पड़ेगा।

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