India US Trade Deal: ट्रेड यूनियन्स, किसान और विभिन्न सेक्टर के कामगार 12 फरवरी, 2026 को भारत बंध की घोषणा कर चुके हैं। इसमें हाल ही में लेबर रिफोर्म पर भी मजदूरों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है, कामगार भी अपने भविष्य की चिंता से दुःखी हैं। इसके अलावा कुछ आर्थिक नीतियों के अतिरिक्त आठवें वेतन आयोग की समस्याओं पर भी कर्मचारी दिगभ्रमित हैं। और सबसे बड़ी समस्या, जो सामने आ रही है, वह है-अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में एक तरफा भारत का समझौता। अमेरिका अपनी शर्तों पर भारत से व्यापार समझौता कर रहा है। फ्री ट्रेड तो दूर की बात है, अमेरिका ने 18 प्रतिशत का टैरिफ भारत के निर्यात पर लगाया है। उसके ऐवज में भारत में अमेरिका से आयात अधिकांश वस्तुओं पर फ्री होगा।
यही नहीं, अमेरिका ने भारत के साथ शर्त रखी है कि वह रूस से तेल का सौदा नहीं करेगा। भारत सरकार अमेरिका के दबाव में यह शर्त मान भी चुकी है। यहीं ही नहीं, यदि भारत ने रूस से तेल लेने की कोशिश की, तब भारत पर दुबारा टैरिफ बढ़ा सकता है। अभी तो 50 प्रतिशत बढ़ाया था, लेकिन भारत ने कोशिश की तो टैरिफ बढ़ाने की कोई सीमा नहीं होगी। वह पांच सौ प्रतिशत टैरिफ बढ़ा सकता है। यह घोषणा, तो ट्रंप सरकार की पहले से ही कर रखी है। उसे तो सिर्फ बहाना चाीिहए, टैरिफ बढ़ाने का। कृषि व्यापार में भारत के किसानों को कोई फायदा नहीं हो रहा है। टैरिफ में कोई विशेष छूट न होने के कारण भारत के कृषि उत्पादो का फायदा किसानों को नहीं हो पायेगा। यानी किसानों की मेहनत बेकार जायेगी। दूसरी तरफ अमेरिका के किसानों का कृषि उत्पाद भारत की मंडियों मे खूब दिखेगा, ऐसा दृष्य आने वाले समय में निश्चित रूप से हेागा । इस स्थिति से देश के किसान विचलित हैं।
ट्रंप सरकार ने अपने समझौते में एक मजबूर कर देने वाली शर्त भारत की सरकार के साथ रखी कि अमेरिका का पांच वर्षों मे व्यापार भारत में पांच सौ अरब डालर का होना चाहिए। यानी ऐसा नहीं होगा, तो भारत के साथ व्यापार समझौते को निरस्त भी किया जा सकता है। क्योंकि यह बंदिश भारत के साथ अपने आप हो जाएगी। अमेरिकी सरकार दुनियाभर में अपनी शर्तों को मनवाने की कोशिश कर रही है। लेकिन भारत की ऐसी मजबूरी नहीं होनी चाहिए। इसी एकतरफा ब्यापार समझौते के खिलाफ देश के किसान और मजदूर अपनी एकता का प्रदर्शन करने जा रहे हैं, उन्हें ऐसा समझसैता रास नहीं आ रहा है। भारत को भी अमेरिका के दबाव में नहीं आना चाहिए।
केंद्रीय मजदूर यूनियनें, जो 12 फरवरी के भारत बंद में शामिल होने जा रही हैं वे – सीटू, ऐटक, इनटक, एचएमएस, आल इंडिया सेंट्रल कौंसिल आफ ट्रेड यूनियन्स, एलपीएफ, यूटीयूसी, एआईबीइए, आल इंडिया बैंक आफिसर्स एसोशिएसन्स और बीईएफआई हैं। आवश्यक सेवाओं को छोड़कर अधिकांश मजदूर यूनियनें इस भारत बंद में हिस्सा ले रही हैं। किसान संगठनों में संयुक्त किसान मोर्चा और आल इंडिया किसान मोर्चा शामिल हो रहे हैं। देश के मजदूरों का यह आक्रोश सही है। क्योंकि अमेरिका के किसानों को वहां की सरकार जमकर सबसिडी देती हैं, उसकी अपेक्षा भारत सरकार अपने किसानों केा उचित सबसिडी नहीं दे पातीं, ऐसे में उनकी मेहनत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, उन्हें भी निर्यात में अपने उत्पादों को उचित दामों में बेचने की अनुमति देनी चाहिए।
Report By: भगवती प्रसाद डोभाल






