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अमेरिका–भारत रिश्तों पर ‘राजनीतिक ठहराव’ का साया, विशेषज्ञ ने दी कड़ी चेतावनी

भारत और अमेरिका के बीच बीते दो दशकों में बनी रणनीतिक साझेदारी एक संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) अमेरिका के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ध्रुव जयशंकर ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा

INDIA-USA RELATIONS: भारत और अमेरिका के बीच बीते दो दशकों में बनी रणनीतिक साझेदारी एक संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) अमेरिका के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ध्रुव जयशंकर ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति को पेश किए गए लिखित बयान में चेतावनी दी है कि अगर दोनों देशों ने बढ़ते राजनीतिक तनावों को जल्द नहीं सुलझाया, तो वर्षों से बनी प्रगति पर विराम लग सकता है।

दो कारणों से ठहराव: व्यापार टैरिफ और पाकिस्तान फैक्टर

जयशंकर के मुताबिक संबंधों में यह ठहराव दो प्रमुख वजहों से पैदा हुआ है— 1. व्यापार और टैरिफ पर बढ़ते विवाद 2. पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व के साथ अमेरिका की बढ़ती नजदीकियां। उन्होंने कहा कि यह वही साझेदारी है जो आर्थिक सहयोग, इंडो-पैसिफिक रणनीति और चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच 1998 से लगातार मजबूत हुई है।

INDIA-USA RELATIONS: इतिहास से लेकर न्यूक्लियर डील तक

विशेषज्ञ ने 1999 में प्रतिबंध हटने से लेकर 2008 के ऐतिहासिक सिविल न्यूक्लियर समझौते, रक्षा सहयोग, इंटरऑपरेबिलिटी, क्वाड की पुनर्सक्रियता और स्पेस–टेक्नोलॉजी–मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती साझेदारी को अमेरिका–भारत रिश्तों की रीढ़ बताया।
लेकिन उन्होंने कहा कि यही प्रगति आज बाधित होती दिख रही है।

INDIA-USA RELATIONS: चीन की चुनौती: सैन्य विस्तार और सीमाई तनाव

जयशंकर ने चेतावनी दी कि मौजूदा तनाव फरवरी 2025 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तय किए गए महत्वाकांक्षी द्विपक्षीय एजेंडा को प्रभावित कर सकता है। साथ ही यह क्वाड, मध्य पूर्व और व्यापक वैश्विक रणनीतिक सहयोग को भी कमजोर कर सकता है।उन्होंने चीन की सैन्य क्षमता, 2020 के गलवान संघर्ष, इंडो-पैसिफिक में डुअल-यूज पोर्ट्स और रिकॉर्ड नौसेना विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे समय में भारत–अमेरिका सहयोग की रफ्तार धीमी होना गंभीर खतरा है। भारत ने भी 2017 के बाद समुद्री गश्त और क्षेत्रीय सहयोग को काफी बढ़ाया है।

पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी रुख से बढ़ी दूरी

अप्रैल में भारत पर हुए आतंकी हमले के बाद अमेरिका की प्रतिक्रिया और फिर पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व से उसकी बढ़ती बातचीत ने भारत–अमेरिका विश्वास में दरार डाली है। पाकिस्तान के आतंकवाद–समर्थन के इतिहास को ‘स्थायी सुरक्षा चुनौती’ बताते हुए जयशंकर ने कहा कि यह मुद्दा संबंधों के केंद्र में है।

टैरिफ विवाद: व्यापारिक भरोसे को बड़ा झटका

उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार समझौता पटरी से उतरने के बाद अमेरिका ने भारत पर जो टैरिफ लगाए हैं, वे दुनिया में किसी भी देश पर लगाए गए सबसे ऊंचे टैरिफों में शामिल हैं। यह निर्यातकों, निवेशकों और दोनों देशों के कर्मचारियों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। अगर स्थिति ऐसी ही रही, तो भारत में इसे ‘राजनीतिक शत्रुता’ के रूप में देखा जाने लगेगा।

तनाव के बीच भी मजबूत स्तंभ रक्षा, ऊर्जा और तकनीक

बढ़ते मतभेदों के बावजूद दोनों देश रक्षा, ऊर्जा और तकनीक में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। इस वर्ष 10-वर्षीय डिफेंस फ्रेमवर्क, बड़े रक्षा सौदे, विस्तारित सैन्य अभ्यास, नासा के साथ मानव अंतरिक्ष मिशन, निसार सैटेलाइट लॉन्च और 1.3 अरब डॉलर के एलएनजी आयात समझौते जैसी उपलब्धियां दर्ज हुई हैं। जयशंकर के अनुसार साझेदारी के चार प्रमुख स्तंभ व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा अभी भी मजबूत हैं और एआई, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स और रक्षा सह-उत्पादन जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

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